Daayra Review: फिल्म दायरा में करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन की जोड़ी क्या कमाल कर पाती है? मेघना गुलजार की यह फिल्म कितनी असरदार है और क्या इसे थिएटर में देखना चाहिए? जानिए हमारे रिव्यू में।
देखने लायक है मेघना गुलजार की दायरा (pic credit-daayra movie)
Daayra Review: बॉलीवुड स्टार करीना कपूर खान करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) और पृथ्वीराज सुकुमारन की ‘दायरा’ (Daayra) को लेकर रिलीज से पहले ही काफी चर्चा है। नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्ममेकर मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी यह फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। जंगली पिक्चर्स और पेन स्टूडियोज के बैनर तले बनी इस फिल्म ने अपने ट्रेलर से ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी थी। ‘दायरा’ की कहानी दो ऐसे किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी मंजिल एक है, लेकिन रास्ते बिल्कुल अलग। दोनों न्याय की तलाश में हैं, मगर परिस्थितियां उन्हें आमने-सामने ला खड़ा करती हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या ‘दायरा’ अपनी गंभीर कहानी और दमदार किरदारों के जरिए दर्शकों पर असर छोड़ पाती है? पढ़िए हमारा पूरा रिव्यू। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-Sach Ka Daayra Song: ‘दायरा’ के गाने की पहली झलक आई सामने, फैंस हुए एक्साइटेड)
‘दायरा’ की कहानी दो पुलिस अधिकारियों—डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) और डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन)—के इर्द-गिर्द घूमती है। रेप का एक गंभीर मामला दोनों को न्याय के दो अलग रास्तों पर खड़ा कर देता है। रमन अपराधियों को कड़ी सजा देने में यकीन रखता है और उसका गुस्सा उसे कानून के दायरे से बाहर जाकर सीक्रेट एनकाउंटर करने तक ले जाता है। वहीं, अजूनी को इसी एनकाउंटर की जांच की जिम्मेदारी मिलती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी कई चौंकाने वाली परतें खोलती है और सिस्टम की खामियों पर सवाल उठाती है। अब अजूनी सच तक पहुंच पाती है या नहीं, यह जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी होगी।
करीना कपूर खान ने डीसीपी अजूनी कोहली के किरदार को सिर्फ निभाया नहीं है, बल्कि उसे अपनी एक्टिंग से एक अलग पहचान दी है। उनकी यह परफॉर्मेंस लंबे समय तक याद रहने वाली है। खास बात यह है कि किरदार को प्रभावशाली बनाने के लिए उन्हें न तो तेज गुस्से का सहारा लेना पड़ा और न ही बेवजह शोर-शराबे का। उनका शांत अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस ही काफी असर छोड़ता है। पुलिस की वर्दी में करीना बेहद सहज और भरोसेमंद नजर आती हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज में एक पुलिस ऑफिसर का अनुशासन और आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। अजूनी को सिर्फ एक सख्त पुलिसवाली बनाकर नहीं दिखाया गया है। उसके अपने विचार हैं, अपनी समझ है और चीजों को देखने का अपना नजरिया है। यही बातें इस किरदार को असली और दर्शकों के करीब बनाती हैं। करीना के एक्सप्रेशंस इस किरदार की सबसे बड़ी ताकत हैं। वह कम बोलकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं। एक गंभीर और संवेदनशील मामले की जांच के दौरान उनके चेहरे पर दिखने वाले भाव कहानी का असर और बढ़ा देते हैं। वह भावुक होती हैं, लेकिन भावनाओं को अपने फैसलों पर हावी नहीं होने देतीं। ‘दायरा’ करीना को एक ऐसी भूमिका में देखने का मौका देता है, जहां उनकी स्टार इमेज से ज्यादा उनकी एक्टिंग नजर आती है। अजूनी कोहली के किरदार में उनका शांत, सधा हुआ और नेचुरल अंदाज फिल्म की कहानी को मजबूती देता है। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-Daayra से लेकर Raazi-Talvar, Meghna Gulzar ने इन फिल्मों में रची अपनी अलग दुनिया)
पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार के किरदार में फिल्म को एक अलग ही ताकत दी है। जहां करीना का अजूनी वाला किरदार शांत और सधा हुआ है, वहीं रमन की मौजूदगी हर सीन में एक तनाव पैदा करती है। वह सिर्फ एक पुलिस अफसर नहीं, बल्कि न्याय को अपने तरीके से देखने वाला ऐसा इंसान है, जिसके फैसलों के पीछे गुस्सा, दर्द और अपनी सोच है।
पृथ्वीराज की सबसे खास बात उनकी एक्टिंग का संयम है। वह चिल्लाकर या जरूरत से ज्यादा एक्सप्रेशन देकर किरदार को बड़ा बनाने की कोशिश नहीं करते। वो अपने आंखों से ही अपनी बात कह देते हैं। करीना और पृथ्वीराज के बीच टक्कर कहानी में लगातार दिलचस्पी बनाए रखती है। सपोर्टिंग कास्ट भी पीछे नहीं रहती। कंवलजीत सिंह, तृप्ति खामकर और क्षिती जोग ने भी प्रभाव छोड़ा है। कुल मिलाकर सभी लोगों ने सुपर से ऊपर वाली एक्टिंग की है।
दायरा की सबसे बड़ी खासियतों में से एक मेघना गुलजार का निर्देशन है। ‘तलवार’, ‘राजी’ और ‘छपाक’ जैसी फिल्मों में उन्होंने हमेशा ऐसे विषय चुने हैं, जहां एक इंसान की कहानी के साथ समाज की बड़ी सच्चाइयां भी दिखाई देती हैं। ‘दायरा’ में भी उनकी यही सोच नजर आती है। मेघना गुलजार, सीमा अग्रवाल और यश केसवानी की कहानी सिर्फ अपराधी और पीड़ित के बीच सही-गलत तय करने तक सीमित नहीं रहती। फिल्म जांच की प्रक्रिया, पुलिस की जिम्मेदारी और कानून के सामने आने वाली मुश्किलों को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाती है। यही वजह है कि फिल्म दर्शकों को सिर्फ यह नहीं सोचने देती कि कौन सही है और कौन गलत, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि कानून के हिसाब से मिलने वाला न्याय और असल जिंदगी में महसूस होने वाला न्याय क्या हमेशा एक जैसा होता है?
फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। कहानी गंभीर है और कलाकारों ने अच्छा काम किया है, लेकिन कुछ जगहों पर फिल्म रेप केस पर ज्यादा ध्यान देती हुई लगती है। इसका असर यह होता है कि लीड एक्टर्स की अपनी कहानी थोड़ी पीछे छूट जाती है।कानून और जांच से जुड़े कुछ हिस्से भी थोड़े और आसानी से आगे बढ़ सकते थे। खासकर जहां जांच के बीच अचानक कहानी ज्यादा भावुक हो जाती है, वहां फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी लगती है। हालांकि, ये कमियां फिल्म की अच्छी कहानी और मजबूत एक्टिंग पर बहुत ज्यादा असर नहीं डालतीं। कुल मिलाकर फिल्म जबरदस्त और देखने लायक है।
दायरा उन फिल्मों में से है जो खत्म होने के बाद भी आपके मन में बनी रहती है। फिल्म एक गंभीर मामले को सिर्फ कहानी की तरह नहीं दिखाती, बल्कि सोचने पर मजबूर करती है कि सही मायने में इंसाफ क्या है। मेघना गुलजार का डायरेक्शन कहानी को संभालकर आगे बढ़ाता है, वहीं करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन अपनी एक्टिंग से फिल्म को और मजबूत बनाते हैं। अच्छी कहानी, शानदार एक्टिंग और एक जरूरी मुद्दे के लिए ‘दायरा’ को हम 4.5 स्टार देते हैं। यह फिल्म थिएटर में देखने के बाद लंबे समय तक याद रहेगी।