फिल्म हैवान देखने के बाद प्रियदर्शन के वो फैंस पूरी तरह से निराश हो जाएंगे, जो उन्हें कमाल की स्टोरी टेलिंग के लिए जानते हैं। अक्षय कुमार और सैफ अली खान के बीच हैवान में रेस लगी थी कि कौन ज्यादा खराब एक्टिंग करेगा।
Haiwaan Review: दर्शकों को बिना सिर-पैर की फिल्म दिखाना है "असली हैवानियत"
फिल्म हैवान का रिव्यू बताने से पहले चलो मैं आपसे एक सवाल पूछता हूं... मुंबई की एक पॉश सोसायटी में रहने वाले रिटायर्ड चीफ जस्टिस की हत्या हो जाती है। उस पॉश सोसायटी से मर्डर करने वाला एक ऑटो में बैठकर निकल जाता है वो भी 10 मिनट तक हाथापायी करके। पुलिस आती है लेकिन पुलिस को सोसायटी के एक भी सीसीटीवी में वो नजर नहीं आता है। मर्डर करने वाला कहां से आया कहां और चला गया पता नहीं और ऐसे वक्त में पुलिस कॉमेडी कर रही है। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: Badshah से सेपरेशन के बाद फिर प्यार करेंगी Isha Rikhi? बिग बॉस 20 की कंटेस्टेंट ने दिया साफ जवाब
चलो एक बार को ये फिर भी मान सकते हो कि मर्डर करने वाले ने पूरी प्लानिंग की होगी लेकिन क्या आप ये मानोगे कि जिस अंधे इंसान को पता है कि मर्डर किसने किया है वो एक दिन मर्डर करने वाले के साथ लिफ्ट में फंस जाता है। वो चीख-चीखकर बिल्डिंगवालों को तो बुलाता है लेकिन सीसीटीवी चेक नहीं कराता है और ना ही पुलिस को याद आता है कि चलो मर्डर वाले दिन का सीसीटीवी नहीं है लेकिन आज के दिन का सीसीटीवी चेक कर लेते हैं और मर्डर सॉल्व। अब सोचो जिस केस को एक बच्चा भी सॉल्व कर सकता है, उसके आसपास प्रियदर्शन साहब ने पूरी की पूरी फिल्म बना दी है और हमसे एक्सपेक्ट कर रहे हैं कि इसे देखने के लिए थिएटर जाएं। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: 'Haiwaan' X Reviews: अक्षय-सैफ की एक्टिंग ने किया इम्प्रेस, फैन्स बोले- 'शानदार फिल्म...'
फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है कि एक चीफ जस्टिस है प्रधान साहब, उन्होंने जवानी में एक बेगुनाह आदमी परशुराम को झूठे केस में सजा सुना दी थी, जिसके बाद उसके पूरे परिवार ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद परशुराम ने ठाना है कि वो उन सबको मार देगा जिनकी वजह से उसका परिवार नहीं रहा है। एक-एक करके उसने लगभग सबसे बदला ले लिया है और अब बारी है चीफ जस्टिस प्रधान और उनकी बेटी की। चीफ जस्टिस को पता है कि परशुराम आकर उससे बदला जरूर लेगा, इसलिए उसने ये सारी बातें श्याम नाम के एक अंधे व्यक्ति को बताई हैं क्योंकि वो बहुत ईमानदार है। एक दिन जस्टिस प्रधान की हत्या हो जाती है और श्याम को अब परशुराम से उस बच्ची की जान बचानी है जिसे जस्टिस प्रधान पीछे छोड़ गए हैं।
फिल्म हैवान में अक्षय कुमार, सैफ अली खान और बोमन ईरानी अहम किरदारों में हैं। स्क्रीन को देखते हुए आप ये तो सोचना छोड़ ही देंगे कि इन्होंने कैसा काम किया है। असल में इस बात पर ध्यान लगाएंगे कि इनमें से किसने सबसे घटिया काम किया है। सैफ अंधे व्यक्ति श्याम के किरदार में हैं, जो अंधे नहीं लग रहे हैं। बोमन ईरानी ने चीफ जस्टिस प्रधान का रोल निभाया है, जिनकी एक्टिंग उनकी नकली दाढ़ी से भी ज्यादा नकली है। अक्षय कुमार तो साइको किलर परशुराम का रोल एक बार भी नहीं पकड़ पाए हैं। कहीं पर वो इतनी लाउड एक्टिंग करते हैं कि हंसी आ जाती है तो कहीं पर वो वही पुराने एक्सप्रेशन देते हैं, जिन्हें हम हजारों बार देख चुके हैं।
हैवान देखने के बाद दिमाग में ये सवाल आ रहा है कि प्रियदर्शन साहब ने 10 साल पहले रिलीज हुई अपनी सफल फिल्म ओप्पम का रीमेक हिन्दी में क्यों बनाया? और बनाया तो बनाया लेकिन इस दुनिया को मुंबई जैसे हाईटेक सिटी में क्यों सेट किया जहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस और कदम-कदम पर सीसीटीवी कैमरे हैं। प्रियदर्शन साहब किसी भी रिव्यूअर का रिव्यू छोड़कर पहले हैवान को अकेले देखें लेकिन शर्त ये है कि वो इंटरवल के अलावा अपनी सीट एक बार भी नहीं छोड़ सकते हैं। हैवान देखते हुए ऐसा लग रहा था कि प्रियदर्शन साहब ने मूवी के किसी भी डिपार्टमेंट पर मेहनत नहीं की है। स्क्रिप्ट ढीली है, कास्टिंग गलत है, बैकग्राउंड म्यूजिक थ्रिल पैदा करने की जगह इरीटेट करता है और मूवी का रनटाइम इतना ज्यादा है दर्शकों के पास सिर पकड़ने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं।
अब चलिए आखिरी फैसले पर आते हैं कि क्या हैवान देखनी चाहिए या नहीं? मेरा सजेशन है मत ही देखिए। अपने पसंदीदा डायरेक्टर और एक्टर्स को इतना खराब काम करते हुए देखकर दिल टूट जाएगा। ना तो इस सवाल का जवाब मेकर्स के पास है कि हैवान क्यों बनाई गई है और ना ही आपको इसका जवाब मिल पाएगा। मैं अपनी ओर से इस फिल्म को 1 स्टार देता हूं।