Mirzapur Movie Review: मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई जब राज्य से बाहर निकलती है और बब्बन यादव यानि कि रवि किशन जैसा दानव कहानी में एंट्री मारता है तो फिल्म का मजा दो गुना नहीं बल्कि चार गुना हो जाता है।
Mirzapur Movie Review: सजनवा ने जैसलमेर में "धांय-धांय" चलाई जिगवना
मिर्जापुर की गद्दी वो ख्वाब है, जिसे पाने के लिए अब तक घर के अंदर से कोशिशें होती रही हैं लेकिन मिर्जापुर द मूवी में दर्शक इस गद्दी को पाने के लिए जैसलमेर की रेतीली जमीन से होने वाली एक साजिश के गवाह बनेंगे। मिर्जापुर सीरीज में हमने देखा कि इस गद्दी के लिए त्रिपाठी खानदान और उसके करीबियों के बीच जंग छिड़ी हुई थी और नए-नए समीकरण बन रहे थे लेकिन इस ब्लॉकबस्टर सीरीज पर बनी 3 घंटे 17 मिनट की फिल्म मिर्जापुर बब्बन यादव यानि कि रवि किशन साहब जैसा दानव लेकर बड़े पर्दे पर आई है, जिसका मुकाबला गुड्डू भैया, बबलू भैया, मुन्ना भैया और मकबूल को करना है और कालीन भैया की कुर्सी बचानी है। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: Mirzapur The Movie First Review: कालीन भैया और गुड्डू पंडित का दिखा भौकाल, साबित होगी ब्लॉकबस्टर
मिर्जापुर द मूवी की शुरुआत अखंडानंद त्रिपाठी के चिर-परिचित अंदाज से होती है और तुरंत ही दर्शक मिर्जापुर की खून-खराबे भरी दुनिया में पहुंच जाते हैं। इस दुनिया में लव है, हेट है, इमोशन्स हैं, ईगो है और एक-दूसरे के सिर पर पैर रखकर मिर्जापुर की गद्दी पर बैठने का जुनून भी है। मिर्जापुर गद्दी हथियाने का यही जुनून छोटे-छोटे प्यादों को खूनी शतरंज का वो मोहरा बनाता है, जो स्क्रीन को रंक्तरंजित कर देता है। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: Mirzapur The Movie Twitter Review: एक्शन पर फिदा हुए फैंस, किसी ने निकाली कमी तो कोई हुआ भौकाल का दीवाना
डायरेक्टर गुरमीत सिंह ने मिर्जापुर सीरीज पर आधारित एक फिल्म बनाने का साहसी फैसला लिया था और उसे सही साबित भी करके दिखाया है। वो ना केवल मिर्जापुर की खूनी धरती पर दोबारा अपने दर्शकों को लेकर जाते हैं बल्कि उन्हें सीट से ना हिलने देने वाली कमाल की कहानी भी दिखाते हैं। मिर्जापुर द मूवी देखते हुए मुझे ऐसा लग रहा था कि गुरमीत सिंह ने किसी इंसान की जिंदगी के सबसे कमाल के पलों को सीन दर सीन जोड़कर एक नई ही दुनिया गढ़ दी है, जो उसके कमाल पलों से भी ज्यादा मजेदार और रंगीन है।
मिर्जापुर द मूवी में दिखाए गए ज्यादातर कैरेक्टर्स को दर्शक पहले से ही जानते हैं, जिनके बारे में ज्यादा कहने की जरूरत नहीं है। इन सभी ने सीरीज में कमाल का काम किया था और फिल्म में भी इम्प्रेस किया है। हां मिर्जापुर द मूवी में दो बड़े बदलाव हैं; पहला बबलू भैया का रोल विक्रांत मैसी की जगह जितेन्द्र कुमार ने निभाया है, जो बिल्कुल भी निराश नहीं करते हैं और दूसरा रवि किशन जो इस फिल्म के मुख्य खलनायक हैं। रवि किशन की तारीफ में बस यही कहा जा सकता है कि वो पहले से इतने विशाल हो चुके मिर्जापुर के कैरेक्टर्स के सामने दस सिर वाले रावण की तरह हैं, जिसका वध होना तो निश्चित है लेकिन वध होने से पहले वो जमकर हाहाकार मचाता है।
मिर्जापुर द मूवी में यूं तो मुझे कोई कमी नजर नहीं आई क्योंकि मैं इस यूनिवर्स को पहले से समझता हूं लेकिन जिन दर्शकों ने सीरीज नहीं देखी है उन्हें फर्स्ट हाफ के दौरान बार-बार आती बैक स्टोरीज थोड़ा कन्फ्यूज कर सकती है, जिसका ख्याल डायरेक्टर गुरमीत सिंह रख सकते थे। जिन दर्शकों ने मिर्जापुर सीरीज नहीं देखी है, वो फिल्म के साथ जुड़ने में थोड़ा वक्त ले सकते हैं लेकिन वो बोर नहीं होंगे।
अब आखिर में बात करते हैं कि क्या मिर्जापुर द मूवी देखनी चाहिए? तो देखो इसे ना देखने का कोई रीजन नहीं है। मिर्जापुर सीरीज के फैंस के लिए ये फिल्म एक बोनस ट्रीट की तरह है, जो इसे देखने के बाद मेकर्स से इसके आगे के पार्ट्स की डिमांड करेंगे और जिन दर्शकों ने सीरीज नहीं देखी है वो मिर्जापुर द मूवी देखने के बाद सीरीज के सारे पार्ट्स देख डालेंगे। लम्बे वक्त के बाद एक एंटरटेनिंग, इंगेजिंग और ग्रिपिंग गैंगस्टर ड्रामा रिलीज हुई है, जिसे हम अपनी ओर से 4 स्टार देते हैं।