Awarapan 2 Movie Review: 19 साल बाद इमरान हाशमी शिवम पंडित बनकर लौटे हैं। 'आवारापन 2' में प्यार, दर्द, बदला और एक्शन है, लेकिन क्या यह पहली फिल्म जैसा असर छोड़ पाती है?
फिल्म आवारापन 2 ने मचाया धमाल (Image Source: AI)
Awarapan 2 Movie Full Review: करीब 19 साल बाद इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित बनकर पर्दे पर लौटे हैं। 2007 में आई आवारापन भले ही रिलीज के समय बड़ी हिट नहीं रही थी, लेकिन बाद में इसे लोगों का खूब प्यार मिला और फिल्म को कल्ट स्टेटस मिल गया। अब आवारापन 2 उसी कहानी और किरदार को आगे बढ़ाती है। फिल्म में इमरान हाशमी के साथ दिशा पाटनी, शबाना आजमी और सुविंदर विक्की जैसे कलाकार नजर आते हैं। फिल्म में प्यार, दर्द, बदला और एक मकसद को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है। अगर आप भी इस फिल्म को देखने का प्लान कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है।
कहानी पहली फिल्म के सालों बाद शुरू होती है। शिवम (इमरान हाशमी) अभी भी अलीया की मौत के गम में जी रहा है। वो उसके कब्र पर जाता है और यादों में खो जाता है। एक दिन वो एक छोटे बच्ची को रोता हुआ सुनता है और उसे गोद ले लेता है। बच्ची का नाम भी अलीया रखता है। बाद में एक परिवार उसे गोद ले जाता है। लेकिन पता चलता है कि वो परिवार चाइल्ड ट्रैफिकिंग का काम करता है। बच्ची को बैंकॉक भेज दिया जाता है। शिवम इंटरपोल वाले की मदद से बैंकॉक जाता है। वहां दो गैंग हैं एक नाफीसा (शबाना आजमी) की और दूसरी अमृत सिंह के परिवार की। अमृत के बच्चे सिकंदर, जारा (दिशा पटानी) और जोरावर गैंग चलाते हैं। शिवम को अलीया और दूसरे बच्चों को बचाना है। फिल्म में शिवम एक बार फिर प्यार, दर्द, बदले और खुद को दोबारा समझने की कोशिश के बीच फंसा नजर आता है। इस बार कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है। इसमें एक्शन भी है और शिवम के अंदर चल रही लड़ाई भी है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इमरान हाशमी हैं। वो शिवम के रोल में कमाल करते हैं दर्द, गुस्सा और प्यार सब कुछ अच्छे से दिखाते हैं। उनकी परफॉर्मेंस फिल्म को संभालती है। पहले हाफ में इमोशनल सीन अच्छे हैं। शिवम का पिता जैसा रोल और बच्ची के साथ के सीन दिल छू लेते हैं। बैंकॉक का कार चेस सीन जोरदार है। कुछ बैकस्टोरी अच्छे से बताई गई हैं। दिशा पटानी के सीन्स अच्छे लगते हैं और शबाना आजमी भी अपनी मौजूदगी दिखाती हैं। नॉस्टेल्जिया फैक्टर अच्छा काम करता है। जो लोग पहली फिल्म के फैन हैं, उन्हें इमरान का ये अंदाज पसंद आएगा। कुल मिलाकर, इमरान फिल्म की जान हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी कहानी है। कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं। खासकर जब कहानी शिवम की इमोशन्स पर ज्यादा रुकती है, तब फिल्म की रफ्तार थोड़ी कम हो जाती है। ये थोड़ी प्रेडिक्टेबल है। ट्विस्ट पहले से समझ आ जाते हैं। दूसरे हाफ में एक्शन और क्राइम ज्यादा हो जाता है, जो पहली फिल्म की इमोशनल स्टोरी से अलग लगता है। म्यूजिक पहली फिल्म जितना असरदार नहीं है। कई कलाकारों को कम स्कोप मिला है। दिशा पटानी और इमरान की केमिस्ट्री कमजोर लगती है। शबाना आजमी का रोल अधूरा लगता है। स्क्रीनप्ले बीच में बिखर जाता है। अगर आप पहली फिल्म जैसी इमोशनल कहानी चाहते हो तो थोड़ी निराशा हो सकती है।
अगर आप इमरान हाशमी के फैन हैं और पुरानी 'आवारापन' की याद ताजा करना चाहते हो तो थिएटर जाकर देख लेना चाहिए। उनकी परफॉर्मेंस और कुछ इमोशनल सीन के लिए फिल्म देखने लायक है। नॉस्टेल्जिया के लिए अच्छा है। लेकिन अगर आपको तेज रफ्तार वाली एक्शन फिल्म चाहिए, जिसमें कहानी लगातार तेजी से आगे बढ़े, तो फिल्म के कुछ धीमे सीन्स आपको परेशान कर सकते हैं। कुल मिलाकर, 'आवारापन 2' एक ऐसी फिल्म है जो इमरान हाशमी और शिवम पंडित के दम पर चलती है। फिल्म में दर्द है, एक्शन है, पुरानी 'आवारापन' की यादें हैं और अच्छा म्यूजिक भी है, लेकिन कहानी की धीमी रफ्तार इसकी बड़ी कमजोरी है।