Daayra: नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर मेघना गुलजार (Meghna Gulzar) इन दिनों चर्चा में बनी हुई हैं। मेघना गुलजार की फिल्म दायरा (Daayra) जल्द ही रिलीज होगी। इस फिल्म में करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। हाल ही में फिल्म दायरा का ट्रेलर रिलीज हुआ, जो कि यूट्यूब पर अबतक छाया हुआ है। बता दें कि दायरा में पहली बार करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन साथ नजर आएंगे। दोनों फिल्म में पुलिस अधिकारियों का किरदार निभा रहे हैं। दोनों का मकसद न्याय दिलाना है, लेकिन न्याय पाने का उनका तरीका बिल्कुल अलग है। फिल्म का ट्रेलर ऐसे कई सवाल उठाता है, जिन पर समाज में लंबे समय से बहस होती रही है। जब गंभीर अपराध लगातार सामने आते हैं और लोगों का गुस्सा बढ़ता जाता है, तो आखिर इंसाफ के लिए कितना इंतजार किया जा सकता है? अगर कानून की रक्षा करने वाले लोग ही कानून पर सवाल उठाने लगें तो क्या होगा? क्या कभी कानून अपने हाथ में लेना सही ठहराया जा सकता है? ‘दायरा’ इन्हीं सवालों के बीच दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती नजर आ रही है। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-Daayra: इन 5 कारणों से छाया करीना-पृथ्वीराज की फिल्म का ट्रेलर, हर कोई कर रहा है चर्चा)
1. पुलिस एनकाउंटर और इंसाफ का सवाल
ट्रेलर में प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक सीन तुरंत ध्यान खींचता है। इसमें पुलिस एनकाउंटर और आत्मरक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। फिल्म इस बात पर बहस करती है कि इंसाफ और बदले के बीच की सीमा आखिर कहां है? क्या पुलिस को खुद फैसला करने का अधिकार होना चाहिए या हर मामले में कानून और न्याय व्यवस्था का पालन जरूरी है?
2. ‘100 में से 99 बार लड़की घर आ जाती है... पर वो एक बार?’
ट्रेलर का सबसे भावुक और परेशान करने वाला संवाद है, “100 में से 99 बार लड़की घर आ जाती है, सर।”इसके जवाब में पृथ्वीराज का किरदार डीसीपी रमन कुमार पूछता है, “और वो एक बार?” सिर्फ चार शब्दों का यह सवाल पूरे मामले को आंकड़ों से निकालकर इंसानी दर्द से जोड़ देता है। क्योंकि जिस परिवार की बेटी उन 99 में नहीं होती, उसके लिए यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी बदल देने वाली घटना होती है।
3. दिखा मां का दर्द
ट्रेलर में क्षिती जोग का किरदार भी एक बेहद भावुक पल देता है। अपने बच्चे की लाश देखकर एक मां का दर्द बिना किसी लंबे संवाद के साफ नजर आता है। जांच, सबूत और कानून के बीच यह सीन उस अपराध की सबसे बड़ी कीमत सामने रखता है,एक जिंदगी का खत्म होना और पीछे छूटे परिवार का दर्द।
4. ‘इधर धूल कहां है साहब, इधर तो कड़क मिट्टी है’
एनकाउंटर की जांच से जुड़ा यह संवाद भी काफी अहम है। ट्रेलर इशारा करता है कि कई बार सिस्टम की कमियों के बीच घटनाओं की कहानी को अपने हिसाब से पेश किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि एनकाउंटर को इंसाफ का जरिया माना जाए या न्याय सिर्फ कानून के जरिए ही मिलना चाहिए? फिल्म कानून व्यवस्था की कमियों, न्याय मिलने में होने वाली देरी और जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी कहानी का हिस्सा बनाती है। यही वजह है कि ‘दायरा’ सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि इंसाफ की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाती नजर आती है।
5. ‘एक जुवेनाइल जो रेप और मर्डर कर सकता है, उसकी प्रोटेक्शन क्यों?’
ट्रेलर का शायद सबसे विवादित और सोचने पर मजबूर करने वाला सवाल जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम से जुड़ा है। सवाल उठाया जाता है कि अगर कोई नाबालिग इतना गंभीर अपराध कर सकता है, तो उसे सुरक्षा क्यों दी जानी चाहिए? यह सवाल बच्चों की सुरक्षा, सजा और जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर एक मुश्किल बहस खड़ी करता है। यही ‘दायरा’ की खासियत भी नजर आती है। फिल्म किसी एक पक्ष को पूरी तरह सही या गलत बताने के बजाय दर्शकों को सोचने के लिए मजबूर करती है। इंसाफ आखिर क्या है और उसे हासिल करने का सही रास्ता कौन सा है? फिल्म इसी सवाल के जवाब तलाशती दिखाई देगी।
बताते चलें कि फिल्म ‘दायरा’ को जंगली पिक्चर्स और डॉ. जयंतीलाल गड़ा (पेन स्टूडियोज) ने प्रोड्यूस किया है, जबकि इसका डिस्ट्रीब्यूशन पेन मरुधर कर रहा है। फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आप इस फिल्म को देखने के लिए कितने एक्साइटेड है हमें कमेंट करके जरूर बताएं...
