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छोटी-छोटी बात पर आने लगा है गुस्सा? डेली लाइफ में शामिल करें ये 5 आसान तरीके

गुस्से को दबाने के बजाय उसे समझना और प्रतिक्रिया देने का तरीका बदलना ज्यादा जरूरी है। रोज की जिंदगी में ये 5 आदतें इसमें मदद कर सकती हैं।

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छोटी-छोटी बात पर आने लगा है गुस्सा? डेली लाइफ में शामिल करें ये 5 आसान तरीके (Photo: iStock)

बहुत से लोगों की शिकायत है कि उन्हें आजकल बहुत ज्यादा गुस्सा आने लगा है। ऐसे लोगों को लगता है कि पहले जिन बातों को आसानी से नजरंदाज कर देते थे, अब उन्हीं पर चिढ़ होने लगी है। एक्सपर्ट्स की मानें तो गुस्सा आना अपने आप में गलत नहीं है। यह एक सामान्य मानवीय भावना है। समस्या तब शुरू होती है जब गुस्सा बार-बार आए, जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाए या जिंदगी को प्रभावित करने लगे।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशनके मुताबिक, अनियंत्रित गुस्सा रिश्तों के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में गुस्से को दबाने के बजाय उसे समझना और प्रतिक्रिया देने का तरीका बदलना ज्यादा जरूरी है। रोज की जिंदगी में ये 5 आदतें इसमें मदद कर सकती हैं।

अपने ट्रिगर को पहचानें

हर व्यक्ति के गुस्से के पीछे कुछ खास परिस्थितियां होती हैं। किसी को ट्रैफिक परेशान करता है, किसी को ऑफिस का दबाव तो किसी को घर में बार-बार एक ही बात दोहराना। इसलिए जब भी गुस्सा आए, तुरंत खुद से पूछें कि मुझे असल में गुस्सा किस बात पर आया? कुछ दिनों तक ऐसी घटनाओं को नोट करें। धीरे-धीरे आपको अपना पैटर्न समझ आने लगेगा। मनोवैज्ञानिक भी एंगर मैनेजमेंट में ट्रिगर्स पहचानने पर जोर देते हैं।

रिएक्ट करने से पहले रुकें

गुस्से में दिमाग तुरंत प्रतिक्रिया देना चाहता है। ऐसे समय पर फोन पर मैसेज भेजना, किसी को कुछ सुना देना या बहस को आगे बढ़ाना बाद में भारी पड़ सकता है। इसलिए एक छोटा-सा नियम बनाएं कि पहले रुकना है, फिर जवाब देना है। कुछ गहरी और धीमी सांसें लें। अगर बातचीत में गर्मागर्मी बढ़ गई है तो कुछ देर के लिए वहां से हट जाना भी बेहतर हो सकता है।

संभल कर बोलें

गुस्से में हम कई बार तुम हमेशा ऐसा करते हो या तुम कभी मेरी बात नहीं समझते। ऐसी बातें सामने वाले को रक्षात्मक बना सकती हैं और छोटी बहस बड़ी लड़ाई में बदल सकती है। इसके बजाय अपनी बात ‘मैं’ वाले वाक्यों में कहें।

हर बात को तुरंत ठीक करना जरूरी नहीं

कभी-कभी हमें लगता है कि सामने वाला गलत है तो उसे उसी वक्त जवाब देना ही होगा, लेकिन हर असहमति को उसी समय सुलझाना जरूरी नहीं। खुद से पूछें कि क्या यह बात एक घंटे बाद भी इतनी ही महत्वपूर्ण लगेगी? अगर जवाब नहीं है, तो उसे छोड़ देना सही है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक कुछ मामलों से थोड़ी दूरी बनाना और हर उकसावे का जवाब न देना एंगर मैनेजमेंट का उपयोगी हिस्सा हो सकता है।

लाइफस्टाइल को रखें मेंटेन

कई बार चिड़चिड़ापन किसी एक घटना की वजह से नहीं, लगातार तनाव और थकान के बीच बढ़ता जाता है। इसलिए अपनी लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना जरूरी है। नियमित फिजिल एक्टिविटी तनाव को कम करने में मदद कर सकती है। पर्याप्त नींद और बेहतर खानपान को भी एंगर मैनेजमेंट का हिस्सा मानी जाती हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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