हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा की तीसरी मंजिल से गिरकर हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। घटना के दिन छात्रा ने अपनी क्लास से यह कहकर छुट्टी ली थी कि वह शौचालय जा रही है, लेकिन थोड़ी देर बाद वह तीसरी मंजिल की छत पर पाई गई और वहां से नीचे गिर गई। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद हादसे ने स्कूल के अंदर के माहौल और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतका के पिता का गंभीर आरोप है कि बच्चों के बीच बिरयानी खाने को लेकर हुए एक मामूली विवाद के बाद उनकी बेटी को कई घंटों तक तेज धूप में खड़ा रखकर सजा दी गई थी। इससे वह काफी मानसिक तनाव में थी। हालांकि, स्कूल प्रशासन इन आरोपों को पूरी तरह नकार रहा है। इस पूरी घटना के बाद 6 ऐसे मुख्य सवाल सामने आ रहे हैं, जिनके जवाब पुलिस और जांच एजेंसियों को तलाशने हैं:
सबूत मिटाने की कोशिश?
एक छात्र का दावा है कि हादसे के तुरंत बाद स्कूल स्टाफ ने मौके से खून धो दिया। सवाल यह है कि फॉरेंसिक जांच से पहले ऐसा क्यों किया गया?
घटना के वक्त एक कैमरा खराब था और दूसरे का एंगल बदला हुआ पाया गया। क्या जानबूझकर फुटेज छिपाने की कोशिश की गई?
परिजनों के अनुसार, बच्ची को घंटों वाइस प्रिंसिपल के दफ्तर के बाहर बैठाकर रखा गया और प्रिंसिपल से मिलने नहीं दिया गया। उस दौरान क्या बातचीत हुई? अगर छात्रों का छत पर जाना सख्त मना था, तो छत का दरवाजा खुला क्यों था और वहां कोई गार्ड तैनात क्यों नहीं था?
परिजनों को देरी से मिली सूचना
जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो बच्ची वहां अकेली पड़ी थी और स्कूल का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। फिलहाल पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस पर सख्त संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है।
