West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर जमकर सियासी बयानबाजी हो रही हैं। इस बीच, जनता का मूड समझने के लिए टाइम्स नाउ नवभारत की टीम 'बंगाल यात्रा' के इस खास एपिसोड में राजधानी कोलकाता पहुंची है, जिसे 'सिटी ऑफ जॉय' कहा जाता है और यह वही शहर है, जहां से सत्तारूढ़ दल जनता के लिए नीतियां तैयार करती हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत की एंकर श्वेता भट्टाचार्य ने कोलकाता की जनता से बात कर एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है, वो देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।
सिटी ऑफ जॉय
कोलकाता, जिसे 'सिटी ऑफ जॉय' कहा जाता है, 1690 में हुगली नदी के किनारे तीन गांवों को मिलाकर बसाया गया था और आज भी यह भारत की सांस्कृतिक धड़कन बना हुआ है। 2026 के चुनावी माहौल को देखें तो यहां का राजनीतिक माहौल काफी गर्म है, विशेष रूप से भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में, जहां शुभेंदु अधिकारी (दादा) ने ममता बनर्जी (दीदी) को उनके अपने गढ़ में चुनौती दी है। यह मुकाबला इसलिए दिलचस्प है, क्योंकि पिछली बार दीदी ने नंदीग्राम में जाकर दादा को चुनौती दी थी और उन्हें हार मिली थी, लेकिन इस बार मुकाबला दीदी के घर में है।
इस दौरान, कुछ लोगों का मानना है कि दीदी ने बहुत काम किया है और वे 'मां माटी मानुष' के करीब हैं। इसके विपरीत, कई मतदाता 'परिवर्तन' की बात कर रहे हैं और उनका कहना है कि बंगाल अब 'कंगाल' हो गया है। कुछ लोगों का मानना है कि 'सोनार बांग्ला' के लिए मोदी का आना जरूरी है।
रोजगार और महिला सुरक्षा को लेकर जनता नाराज
लोगों में रोजगार को लेकर काफी नाराजगी है। कुछ मतदाताओं ने दीदी पर 'चाकरी चोर' (नौकरियां चुराने वाली) होने का आरोप लगाया और कहा कि वे केवल 1500 रुपये प्रति माह देकर लोगों को बहला रही हैं, जिससे कुछ नहीं होने वाला है। जनता महिलाओं की सुरक्षा को एक बड़ा मुद्दा मानती है।
मंदिर मॉडल का कितना पड़ेगा असर
मंदिर मॉडल और धार्मिक ध्रुवीकरण दीदी द्वारा बनवाए जा रहे मंदिरों (दीघा जगन्नाथ मंदिर, महाकाल मंदिर) पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे हिंदू वोट बैंक साधने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि हिंदू अब समझदार हो गए हैं और वे केवल मंदिर बनाने से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, कुछ लोगों को डर है कि भाजपा के आने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।
