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शरद पवार ने महाराष्ट्र चुनाव के लिए बनाया ये खास प्लान, सरकार के खिलाफ पेश किया 'आरोपपत्र'

Maharashtra Politics: शरद पवार की पार्टी राकांपा (एसपी) ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ 'आरोपपत्र' पेश किया है। पार्टी नेता ने बताया कि हम पूरे राज्य में ‘हक्क मागतोय महाराष्ट्र’ (हक मांग रहा महाराष्ट्र) अभियान शुरू कर रहे हैं। हम महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने के लिए एकजुट हैं।

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महाराष्ट्र चुनाव ेके लिए शरद पवार की पार्टी का क्या है तैयारी?

Sharad Pawar Plan for Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने बुधवार को महायुति सरकार के खिलाफ एक 'आरोपपत्र' पेश किया, जिसमें राज्य से उद्योगों के पलायन और कानून-व्यवस्था के 'ध्वस्त' होने को उजागर किया गया। शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) ने 'महाराष्ट्र की आर्थिक गिरावट, उद्योगों के पलायन और महिला सुरक्षा' सहित दस महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक अभियान शुरू किया।

हक मांग रहा महाराष्ट्र अभियान

लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले और पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने मंत्रालय के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा तक मार्च किया और बाद में दक्षिण मुंबई के हुतात्मा चौक तक पैदल मार्च किया। जयंत पाटिल ने संवाददाताओं से कहा, 'हम पूरे राज्य में ‘हक्क मागतोय महाराष्ट्र’ (हक मांग रहा महाराष्ट्र) अभियान शुरू कर रहे हैं। हम महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने के लिए एकजुट हैं।'

इस अभियान में दृश्य-श्रव्य माध्यम का इस्तेमाल होगा जिसमें विभिन्न मीडिया पर विज्ञापन और एक नया गाना शामिल है। उन्होंने कहा कि पहला विज्ञापन 'बढ़ती बेरोजगारी और प्रमुख परियोजनाओं को गुजरात में स्थानांतरित करने' पर केंद्रित है।

सरकार की कार्रवाइयों का खामियाजा

पाटिल ने आरोप लगाया, 'पिछले दस वर्षों में भाजपा और उसकी दो सहयोगियों (अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और शिवसेना) ने छत्रपति शिवाजी महाराज, ज्योतिबा शाहू, ज्योतिबा फुले और बी आर आंबेडकर की विचारधारा को कमजोर किया है।' कृषि संकट का आरोप लगाते हुए पाटिल ने दावा किया कि किसान इसलिए परेशान हैं क्योंकि वे सोयाबीन, प्याज और संतरे के लिए उचित मूल्य चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'विशेष रूप से डेरी किसानों को इस सरकार की कार्रवाइयों का खामियाजा भुगतना पड़ा है।'

पाटिल ने आरोप लगाया कि आम लोग महंगाई तथा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी से जूझ रहे हैं और जीएसटी भुगतान पूल में सबसे अधिक योगदान देने वाला राज्य होने के बावजूद पड़ोसी राज्यों के विपरीत महाराष्ट्र को केंद्रीय बजट में कोई न्याय नहीं मिला।

चुनाव जीतकर सत्ता में आएगी एमवीए

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश भाजपा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर 'निर्भरता' चुनावों के बाद महाराष्ट्र में सरकार बदलने का संकेत देती है। पाटिल ने कहा, 'हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन शाह को मुंबई में डेरा डालना पड़ रहा है, जो महाराष्ट्र सरकार में संकट की गंभीरता को दर्शाता है। महा विकास आघाडी (एमवीए) चुनाव जीतकर सत्ता में आएगी।'

राज्य सरकार द्वारा देशी गायों को राज्यमाता-गोमाता घोषित करने के फैसले पर पाटिल ने कहा, 'भाजपा ने चुनावी बॉण्ड के जरिए गोमांस निर्यातकों से कितना पैसा प्राप्त किया? इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन्हें गौमाता से कितना प्यार है।' केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल में कहा था कि वंचित महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ अन्य क्षेत्रों में सब्सिडी के समय पर भुगतान को प्रभावित कर सकती है। इस बारे में पूछे जाने पर पाटिल ने कहा कि गडकरी की राज्य की वित्तीय हालत पर टिप्पणियां सच हो सकती हैं क्योंकि भाजपा के वरिष्ठ नेता बेलाग-लपेट अपनी बात कहने के लिए जाने जाते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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