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Maharashtra: चाचा-भतीजे का क्या फिर होगा मिलन? अजित पवार के लिए शरद पवार बोले- हम साथ-साथ हैं

Maharashtra Politics: क्या महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से ठीक चाचा-भतीजे में सुलह होने वाली है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार को लेकर थोड़ी नरम रवैया अपना लिया है। उन्होंने कहा है कि परिवार के रूप में हम साथ-साथ हैं। आपको बताते हैं उन्होंने और क्या कहा।

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शरद पवार और अजित पवार?

Chacha-Bhatija: पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने सोमवार को कहा कि वह और उनके भतीजे अजित पवार परिवार के रूप में साथ-साथ हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अजित एक अलग राजनीतिक दल का नेतृत्व कर रहे हैं। शरद पवार ने तटीय कोंकण क्षेत्र के चिपलून में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'घरत तारि एकत्रच आहेत (कम से कम घर में हम एक साथ हैं)।'

चाचा-भतीजे की जोड़ी पर क्या बोले शरद पवार?

वह 'राज्य के विभिन्न वर्गों' की इस मांग से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि चाचा-भतीजे की जोड़ी को एक बार फिर साथ आना चाहिए। अजित पवार ने पिछले साल जुलाई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से बगावत की थी तथा एकनाथ शिंदे नीत महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यंत्री के रूप में शामिल हो गए थे। हाल के समय में उनके सत्तारूढ़ गठबंधन में बने रहने को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

'अन्य पार्टी के फैसलों पर टिप्पणी क्यों करें?'

अजित पवार की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कि उनका अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को बारामती में चचेरी बहन सुप्रिया सुले के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ाने का फैसला गलत था, शरद पवार ने कहा, 'वह एक अलग पार्टी में हैं। हम किसी अन्य पार्टी के फैसलों पर टिप्पणी क्यों करें?' विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) के मुख्यमंत्री पद के चेहरे से जुड़े सवाल पर शरद पवार ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि फिलहाल यह कोई जरूरी मुद्दा है।'

समाजवादी पार्टी को लेकर क्या बोले शरद पवार?

एमवीए में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद चंद्र पवार (राकांपा-एसपी), कांग्रेस और शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-यूबीटी) शामिल हैं। राकांपा (एसपी) प्रमुख ने कहा कि आपातकाल के बाद जब चुनाव हुए तो मतदान से पहले प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में मोरारजी देसाई के नाम का खुलासा नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा, 'हमारा (एमवीए का) प्रयास समाजवादी पार्टी (सपा) और पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी जैसी अन्य पार्टियों की मदद से महाराष्ट्र में एक प्रगतिशील सरकार का विकल्प देना है।'

तिरुपति मंदिर में प्रसाद विवाद को लेकर क्या बोले?

शरद पवार ने कहा, 'हमने महसूस किया है कि महाराष्ट्र के लोगों ने आगामी चुनाव में हमें (एमवीए) मौका देने का मन बना लिया है।' आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के इस दावे के बारे में पूछे जाने पर कि तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू बनाने के लिए खराब गुणवत्ता वाले घी का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें जानवरों की चर्बी मिली हुई थी, शरद पवार ने कहा, 'अगर कुछ मिलाया गया था तो यह बहुत गलत है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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