Rajasthan Elections 2023: राजस्थान में कांग्रेस के नेता सचिन पायलट ने दावा किया है कि सूबे इस बार लोगों का मिजाज रिवाज बदलने वाला लग रहा है। उन्होंने इसके साथ ही पुरानी बात को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने और अभी पर ध्यान देने पर जोर दिया। दो टूक कहा कि छोड़ दीजिए कि किसने क्या कहा...जनता समझदार और संजीदा होती है और वह सही फैसला करती है।
शनिवार (25 नवंबर, 2023) को मतदान के बीच समाचार एजेंसी एएनआई को उन्होंने बताया- हर चुनाव अलग होता है। हर सूबा अलग होता है। मुझे पूरा यकीन है कि यहां के लोगों का मिजाज इस बार रिवाज बदलने का रहेगा। लोग चाहते हैं कि जो काम कर के दिखाते हैं, अपनी बात पर प्रतिबद्ध रहते हैं और जिनके पास विजन है...उन दलों और पार्टियों को मौका मिलता है। ऐसे में कांग्रेस को दोबारा मौका मिलेगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बीजेपी की कैंडिडेट वसुंधरा राजे के बयानों को लेकर पूछे जाने पर पायलट दो टूक बोले, "अब छोड़िए न कि किसने क्या कहा...जनता का निर्णय हमेशा सही होता है। पब्लिक से ज्यादा समझदार और संजीदा न तो नेता होता है और न ही पत्रकार। ऐसे में पब्लिक पर छोड़ देना चाहिए। वह कांग्रेस के कामों को देखते हुए अपना वोट डालेगी।"
156 सीटें जीतने के दावे पर उन्होंने बताया, "मैं आंकड़ों में कभी जाता नहीं हूं, मगर सरकार बनाने के लिए जो नंबर चाहिए उसके साथ लोगों का आशीर्वाद हमें मिलेगा।" प्रचार के दौरान गहलोत के साथ न नजर आने पर बोले- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी या फिर प्रियंका गांधी लोग जब आते हैं तब हम सब वहां जाते हैं। मीटिंग करते हैं।
उन्होंने आगे कहा- चूंकि, राज्य इतना बड़ा है, जिसे संभालना पड़ता है। अपना-अपना काम देखना पड़ता है। भाजपा में मंच छोड़िए, वहां तो लोग शक्ल देखना पसंद नहीं करते। ऐसे में हमने और हमारी पार्टी ने एकजुट होकर काम किया। भाजपा में बिखराव और तनाव जगजाहिर है।
वैसे, एक रोज पहले यानी शुक्रवार (24 नवंबर, 2023) को पायलट ने कहा था कि किसी नेता को उनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मोदी की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर पायलट ने टोंक में मीडिया से कहा था,‘‘मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं है, मेरी चिंता मेरी पार्टी, मेरी जनता करेगी और हम उसके प्रति समर्पित हैं।’’
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (23 नवंबर, 2023) को सूबे में हुई एक रैली में पायलट के संदर्भ में कहा,‘‘...गुर्जर समाज का एक बेटा राजनीति में जगह बनाने के लिए संघर्ष करता है। पार्टी के लिए जान लगाता है और सत्ता मिलने के बाद 'शाही परिवार' की शह पर उसे दूध में से मक्खी की तरह निकाल करके फेंक दिया जाता है।’’
