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क्या बदलने वाली है रविवार की छुट्टी? ईसाईयों से जुड़ा है यह दिन, PM Modi ने क्यों किया इसका जिक्र

PM Modi on Sunday Holiday: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रविवार का दिन हिंदुओं से नहीं बल्कि ईसाई समुदाय से जुड़ा हुआ है। यह 200-300 वर्षों से छुट्टी का दिन है।जब अंग्रेज यहां राज करते थे तो ईसाई समाज छुट्टी (रविवार को) मनाता है, ये परंपरा तब से शुरू हुई।

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पीएम मोदी

Photo : Twitter

PM Modi on Sunday Holiday: स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे हों या फिर दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा लोग, सभी को रविवार को इंतजार जरूर होता है। यह दिन सप्ताहिक छु्टी का होता है, लेकिन छुट्टी के लिए रविवार का ही दिन क्यों? इसके बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका जिक्र करके नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने झारखंड के दुमका में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन हिंदुओं से नहीं बल्कि ईसाई समुदाय से जुड़ा हुआ है।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी झारखंड के एक जिले में रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश घोषित किए जाने के फैसले की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने इसको लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के बाद, इस बार रविवार को अवकाश होने के बावजूद झारखंड के एक जिले में इसे बदलकर शुक्रवार कर दिया गया।

रविवार की छुट्टी को लेकर पीएम मोदी ने क्या कहा?

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रविवार का दिन हिंदुओं से नहीं बल्कि ईसाई समुदाय से जुड़ा हुआ है। यह 200-300 वर्षों से छुट्टी का दिन है।जब अंग्रेज यहां राज करते थे तो ईसाई समाज छुट्टी (रविवार को) मनाता है, ये परंपरा तब से शुरू हुई। अब इन्होंने एक जिले में रविवार की छुट्टी पर ताले लगवा दिए, बोले शुक्रवार की छुट्टी होगी। पहले हिंदुओं से झगड़ा, अब ईसाइयों से भी झगड़ा। ये क्या चल रहा है? यह इनकी सांप्रदायिक राजनीति का खतरनाक उदाहरण है। अब वे ईसाइयों से भी लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो नीत गठबंधन राज्य के संसाधनों को लूट रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य अब नकदी के पहाड़ के लिए जाना जाता है।

झारखंड से हुई लव जिहाद की शुरुआत

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सांप्रदायिक राजनीति को लेकर जेएमएम को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, ये लोग नफरत और सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा मुझे मेरे एक साथी बता रहे थे कि लव जिहाद शब्द पहली बार झारखंड में आया। झारखंड पहला राज्य है, जहां से लव जिहाद शुरू हुआ। झारखंड वालों ने ये शब्द दिया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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