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हरियाणा चुनाव में किस्मत आजमाएगा नूंह हिंसा का आरोपी बिट्टू बजरंगी, इस सीट से भरा पर्चा

Bittu Bajrangi: गौरक्षा बजरंग फोर्स बनाने वाले बिट्टू बजरंगी का विवादों से पुराना नाता है। बजरंगी नूंह हिंसा के मामले में आरोपी है, जो पिछले साल जुलाई में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित जुलूस पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद भड़की थी। अब उसने फरीदाबाद के एनआईटी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है।

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बिट्टू बजरंगी ने निर्दलीय भरा पर्चा।

Bittu Bajrangi: हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव दिलचस्प होने जा रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन होते-होते रह गया तो दूसरी तरफ नेताओं की दलबदली ने पार्टियों के सामने नई चुनौती ला खड़ी की है। इस बीच खबर है कि हरियाणा में नूंह हिंसा के आरोपी बिट्टू बजरंगी ने भी चुनाव में ताल ठोक दी है। जानकारी के मुताबिक, गौरक्षक बिट्टू बजरंगी उर्फ राजकुमार पांचाल ने सोमवार को फरीदाबाद के एनआईटी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है।

जिला निर्वाचन अधिकारी विक्रम सिंह ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि बजरंगी ने एनआईटी फरीदाबाद सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया है। बता दें, गौ रक्षा बजरंग फोर्स बनाने वाले बजरंगी का विवादों से पुराना नाता है। बजरंगी नूंह हिंसा के मामले में आरोपी है, जो पिछले साल जुलाई में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित जुलूस पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद भड़की थी।

'आवाज उठाता रहूंगा'

इस बीच बिट्टू बजरंगी का बयान सामने आया है। उसने अपने समर्थकों के साथ सेक्टर 12 स्थित मिली सचिवायल पहुंचकर नामांकन दाखिल किया। इसके बाद उसने कहा कि क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाकर उतारा है। जनता दुखी है और बदलाव चाहती है, नेताओं ने एनआईटी की जनता को ठगा है। बिट्टू बजरंगी ने आगे कहा, अब नेता लाखों-करोड़ों खर्च कर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मेरे पास पैसा नहीं केवल जनता है। हमारी बहन-बेटी के साथ लव हिजाद होगा तो मैं आवाज उठाता रहूंगा। उसने कहा, सरकार के पास काम करने की नीयत नहीं है, गाय के कल्याण के लिए करोड़ों रुपये आते हैं, लेकिन कहां जाते हैं?

नूंह हिंसा में सामने आया था नाम

बता दें, बीते साल हरियाणा के नूंह में भड़की हिंसा में बिट्टू बजरंगी का नाम सामने आया था। नूंह में 31 जुलाई को ब्रज मंडल यात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। सामने आया था कि यात्रा में बिट्टू बजरंगी के गोरक्षा बजरंग फोर्स ने लोगों को यात्रा में आने की अपील वाले पोस्टर बांटे थे। उस पर यात्रा के दौरान हथियारों को हवा में लहराने का भी आरोप था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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