पश्चिम बंगाल के दो-तिहाई मुस्लिम आबादी वाले मुर्शिदाबाद जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नामों का हटाया जाना और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य तय करने वाले अहम मुद्दे बनकर उभरे हैं।एसआईआर के बाद 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में जिले के करीब 55 लाख मतदाताओं में से 11 लाख से अधिक लोगों को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटने से भले ही तृणमूल कांग्रेस को कुछ मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन इससे सत्तारूढ़ दल के पक्ष में मतदाताओं का ध्रुवीकरण भी संभव है।
सांप्रदायिक हिंसा ने कैसे बदला राजनीतिक माहौल?
जिले में 2025 से लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा ने भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है। 12 अप्रैल 2025 को शमशेरगंज में 72 वर्षीय हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन की भीड़ द्वारा हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में जांगीपुर, शमशेरगंज, धुलियान और सूती में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग जाम, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति पर काबू पाने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद केंद्रीय बलों की तैनाती, निषेधाज्ञा और अस्थायी रूप से इंटरनेट बंद करने जैसे कदम उठाए गए। करीब 60 मामले दर्ज किए गए और लगभग 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि सैकड़ों लोग भागीरथी नदी पार कर मालदा जिले में शरण लेने को मजबूर हुए। घटना के लगभग एक साल बाद भी इसके जख्म ताजा हैं। 27 मार्च को जांगीपुर के रघुनाथगंज में राम नवमी शोभा यात्रा के दौरान फिर हिंसा भड़क गई, जिसमें मुस्लिम समुदाय की दुकानों और ठेलों को निशाना बनाते हुए आगजनी की गई।
टीएमसी बनाम बीजेपी
जांगीपुर से तृणमूल के विधायक जाकिर हुसैन ने इन घटनाओं को भाजपा की रणनीति बताया और आरोप लगाया कि पार्टी सांप्रदायिक तनाव पैदा कर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण करना चाहती है। 2021 के चुनाव में हुसैन ने 53.65 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा 22.17 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। इस बार भाजपा ने यहां से वकील चित्तो मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है। शमशेरगंज में तृणमूल ने हाल ही में पार्टी में शामिल हुए स्थानीय उद्यमी नूर आलम को टिकट दिया है, जिनका नाम भी एसआईआर के बाद ‘विचाराधीन’ सूची में शामिल रहा है। वहीं, भाजपा उम्मीदवार षष्ठी चरण घोष तृणमूल सरकार पर भ्रष्टाचार और खराब बुनियादी सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। सूती सीट पर तृणमूल ने मौजूदा विधायक इमानी विश्वास पर फिर भरोसा जताया है, जहां उनका मुकाबला भाजपा के नए चेहरे महावीर घोष से होगा।
