Gujarat Assembly Elections 2022: गुजरात (Gujarat) में चुनावी समर के बीच 30 बरस की एनेस्थेटिस्ट पायल कुकरानी को टिकट देने पर सियासी बवाल खड़ा हो गया। आनन-फानन डैमेज कंट्रोल मोड में आई बीजेपी के गुजरात इकाई के चीफ सीआर पाटिल ने उन्हें टिकट दिए जाने का बचाव किया। दो टूक कहा कि वह अपनी योग्यता के आधार पर इलेक्शन लड़ रही हैं।
पाटिल ने गुरुवार को मीडिया से कहा, ‘‘कोर्ट के आदेशानुसार, उन्हें (मनोज) दोषी ठहराया गया और उन्होंने अपनी जेल की सजा पूरी की। उनकी बेटी एक डॉक्टर हैं और शादीशुदा हैं। जब घटना हुई तो उनकी उम्र 10-15 साल रही होगी।’’ पायल की उम्मीदवारी पर हुए सवाल पर वह आगे बोले, ‘‘वह चुनाव लड़ने और जीतने में सक्षम हैं। वह पार्टी कार्यकर्ता हैं। हमने उन्हें योग्यता के आधार पर चुनाव लड़ने के लिए कहा है।’’
दरअसल, कुकरानी साल 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले (गोधरा दंगों के बाद अहमदाबाद जिले में) के 16 दोषियों में से शामिल मनोज कुकरानी की बेटी हैं। उन्हें अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का टिकट दिया गया है। नरोदा पाटिया दंगा में 97 मुसलमान मारे गए थे। पायल नरोदा विधानसभा क्षेत्र से चुनावी ताल ठोंक रही हैं।
पायल एमबीबीएस ग्रैजुएट हैं और उन्होंने अपनी प्रोफेश्नल फीस को आय का स्रोत बताया है। पति के साथ उनकी चल संपत्तियां 39.45 लाख रुपए की हैं, जबकि उनके पास 65 लाख रुपए की अचल संपत्तियां हैं। साथ ही उन पर 46.24 लाख रुपए की देनदारी है। उनके खिलाफ कोई क्रिमिनल केस नहीं है।
वह बीजेपी से काफी लंबे समय से जुड़ी हुई हैं, जबकि उनकी मां बीजेपी पार्षद हैं और उनका परिवार भी भगवा पार्टी से काफी समय से जुड़ा है। कुकरानी ने कहा था कि अगर वह चुनाव जीतेंगी तो स्थानीय लोगों की मदद और भविष्य में विधानसभा का विकास करना उनकी प्राथमिकता पर होगा।
