बिहार विधानसभा चुनाव का औपचारिक बिगुल बज गया है। सोमवार को भारतीय निर्वाचन आयोग ने बहुप्रतीक्षित बिहार विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार राज्य में कुल 90,712 मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) बनाए जाएंगे — जिनमें 13,911 शहरी और 76,801 ग्रामीण क्षेत्र में होंगे। इनमें से 1,044 पोलिंग बूथों की जिम्मेदारी महिलाओं के पास होगी।
बिहार चुनाव में कितने फर्स्ट टाइम वोटर
सीईसी ने बताया कि इस बार बिहार के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.43 करोड़ है। इनमें 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिला और 1,725 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, 7.2 लाख दिव्यांग मतदाता, 4.04 लाख 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, और 14 हजार से अधिक शतायु मतदाता भी मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस चुनाव में करीब 14 लाख प्रथम बार वोट डालने वाले युवा मतदाता भी शामिल होंगे।
मतदान को लेकर चुनाव आयोग की तैयारी
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग का लक्ष्य इस बार का चुनाव “सुगम, सुरक्षित और पारदर्शी” बनाना है। उन्होंने कहा, “पूरी चुनावी मशीनरी मतदाताओं के साथ खड़ी रहेगी। कानून व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में कराया जाएगा।” सीईसी ने बताया कि 24 जून से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया गया। 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की गई और राजनीतिक दलों को सौंपी गई। 1 अगस्त से 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियों की अवधि रखी गई। पात्रता के परीक्षण के बाद 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की गई, जिसे सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराया गया है। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि रह गई है तो जिलाधिकारी के पास अपील दायर की जा सकती है, और यदि किसी का नाम सूची में नहीं है, तो वह नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक अपना नाम जुड़वा सकता है।
हर सीट पर एक पर्यवेक्षक
मुख्य चुनाव आयुक्त ने जिला स्तर पर किसी भी प्रकार की फर्जी खबरों को रोकने के लिए चुनाव आयोग की योजनाओं की भी जानकारी दी ताकि गलत सूचनाओं का मुकाबला किया जा सके। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 243 निर्वाचन क्षेत्रों में से प्रत्येक के लिए एक अलग पर्यवेक्षक होगा, जबकि पहले एक पर्यवेक्षक एक से अधिक सीटों के लिए ज़िम्मेदार होता था।
