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पिपरा विधानसभा सीट: पहले कांग्रेस और CPI का रहा दबदबा, अब RJD का प्रभाव, NDA के लिए बड़ी चुनौती

पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में श्यामबाबू यादव ने सीपीएम के राजमंगल प्रसाद को 8,177 वोटों के अंतर से हराया। उस समय पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,39,434 थी और मतदान प्रतिशत 59.08% रहा। अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 15.89% और मुस्लिम मतदाता 12.10% थे।

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पिपरा विधानसभा सीट का समीकरण

Bihar Assembly Elections 2025 Pipra Assembly Constituency: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित पिपरा विधानसभा क्षेत्र इस बार विधानसभा चुनावों में काफी चर्चा में रहने वाला है। यह सीट पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसमें मेहसी, चकिया (पिपरा) और टेकटारिया प्रखंड आते हैं। 1957 में अस्तित्व में आई इस सीट को पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इसे सामान्य वर्ग के लिए कर दिया गया।

पिपरा का राजनीतिक इतिहास

राजनीतिक इतिहास की बात करें तो पिपरा पर शुरू से ही कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का दबदबा रहा। कांग्रेस ने पांच बार यहां जीत दर्ज की, वहीं सीपीआई को तीन बार सफलता मिली। समय के साथ दोनों पार्टियों की पकड़ कमजोर हुई और अब क्षेत्र आरजेडी गठबंधन के प्रभाव में है। 1990 और 1995 में जनता दल ने यहां जीत हासिल की, 2000 में आरजेडी ने सीट पर कब्जा जमाया, जबकि 2005 में दो बार भाजपा ने जीत दर्ज की। 2010 में जदयू ने इसे अपने नाम किया। 2015 से भाजपा के श्यामबाबू प्रसाद यादव इस सीट के विधायक हैं, लेकिन उनके जीत का अंतर हमेशा कम और अस्थिर रहा है।

पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में श्यामबाबू यादव ने सीपीएम के राजमंगल प्रसाद को 8,177 वोटों के अंतर से हराया। उस समय पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,39,434 थी और मतदान प्रतिशत 59.08% रहा। अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 15.89% और मुस्लिम मतदाता 12.10% थे। पिपरा पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्र है, जहां लगभग 90.52% मतदाता गांवों में रहते हैं। क्षेत्र की जातीय संरचना जटिल है, जिससे विपक्षी दलों को संभावित मौके नजर आ रहे हैं। हालांकि मतदाता सूची में बदलाव से राजनीतिक परिदृश्य और अधिक बदल सकता है।

व्यापार और संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण

नेपाल सीमा के पास होने के कारण यह क्षेत्र व्यापार और संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण है। गंगा मैदानी क्षेत्र में आने वाली यह सीट गंडक और बुढ़ी गंडक नदियों से उपजाऊ भूमि पाती है। अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है। धान, मक्का, गन्ना, गेहूं और दालों के अलावा कुछ जगह पटसन की खेती भी होती है। ग्रामीण लघु उद्योग जैसे मोती के बटन का निर्माण और बकरी पालन स्थानीय आय के सहायक साधन हैं। नेपाल के रक्सौल और सुगौली से निकटता व्यापार को और मजबूत बनाती है। हालांकि बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

NDA के लिए चुनौतीपूर्ण सीट

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आ रहे हैं, पिपरा एक संघर्षपूर्ण और निर्णायक सीट के रूप में उभर रही है। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का क्षेत्र में दबदबा रहा है, लेकिन लगातार घटती बढ़त और मतदाता संरचना में बदलाव इसे किसी भी पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के चलते पिपरा से चुनावी सरप्राइज की उम्मीद की जा रही है।

6 और 11 नवंबर को वोटिंग

बता दें कि बिहार में दो चरणों में चुनाव होगा। 6 और 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को नतीजों का एलान होगा। उम्मीदवारों के लिए पहले चरण की नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 17 अक्तूबर है और दूसरे चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 अक्तूबर है। पहले चरण के लिए नामांकन वापिस लेने की आखिरी तारीख 20 अक्तूबर और दूसरे चरण के लिए नामांकन वापिस लेने की आखिरी तारीख 23 अक्तूबर है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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