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Bhore Assembly Seat: बिहार चुनाव में गोपालगंज की भोरे सीट पर कांटे की टक्कर, लालू के गढ़ में JDU की चुनौती

Bihar Bhore Assembly Election 2025: बिहार में गोपालगंज जिले की भोरे विधानसभा सीट लालू का गढ़ कही जाती है इसलिए यह काफी खास मानी जा रही है, जानिए इस सीट के चुनावी समीकरण...

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गोपालगंज की भोरे सीट पर कांटे की टक्कर

Bihar Assembly Election 2025 Bhore Seat: बिहार में भोरे विधानसभा सीट गोपालगंज जिले का एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट में कुचायकोट और मांझा दो प्रमुख सामुदायिक विकास खंड शामिल हैं। बिहार के गोपालगंज जिले का भोरे विधानसभा क्षेत्र राज्य की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान रखता है।

यह गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है। भौगोलिक रूप से यह इलाका बिहार के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित है और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, जो इसे सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से एक खास रंग देता है।

सुनील कुमार जेडीयू से तो धनंजय कुमार (CPI ML(L) से तो वहीं प्रीति किन्नर जनसुराज पार्टी से उम्मीदवार हैं। भोरे प्रखंड मुख्यालय गोपालगंज शहर से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले का पडरौना नगर यहां से करीब 40 किलोमीटर दूर है, जबकि सिवान, बेतिया और देवरिया जैसे प्रमुख शहर भी पास ही हैं।

भोरे में औद्योगिक विकास लगभग नगण्य

पटना यहां से लगभग 145 किलोमीटर की दूरी पर है। भोरे गंडक नदी घाटी में स्थित है और उपजाऊ गंगा के मैदानों में आता है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है।धान, गेहूं, मक्का और गन्ना इसकी प्रमुख फसलें हैं। इलाके में कुछ चावल मिलें, ईंट भट्टे और छोटे कृषि-आधारित उद्योग मौजूद हैं, लेकिन औद्योगिक विकास लगभग नगण्य है।

इस विधानसभा सीट का गठन 1957 में हुआ था। इसमें भोरे, कटेया और विजयीपुर प्रखंड शामिल हैं। यह क्षेत्र न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी दिलचस्प है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भोरे का नाम द्वापर युग के योद्धा राजा भूरीश्रवा से जुड़ा है, जो कौरवों की ओर से महाभारत के युद्ध में लड़े थे।

सत्ता का संतुलन कई बार बदलता रहा है

भोरे विधानसभा क्षेत्र में अब तक 16 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें सत्ता का संतुलन कई बार बदलता रहा है। कांग्रेस पार्टी ने यहां 8 बार जीत हासिल की। इसके अलावा, जनता दल, भाजपा और राजद ने 2-2 बार यहां जीत दर्ज की है, जबकि जनता पार्टी और जदयू को एक-एक बार सफलता मिली है।

चुनाव में जातीय समीकरणों की भूमिका बेहद अहम

इस क्षेत्र का वोटिंग का ट्रेंड यह दर्शाता है कि यहां की राजनीति अक्सर राज्यव्यापी माहौल और लहर के साथ बदलती है। 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन जीत का अंतर 500 वोटों से भी कम था। भोरे की राजनीतिक दिशा तय करने में जातीय समीकरणों की भूमिका बेहद अहम है। यहां अनुसूचित जाति के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, क्योंकि यह सीट आरक्षित है। यहां यादव मतदाताओं की संख्या लगभग 12.5 फीसदी है, जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 11.1 फीसदी हैं।

गोपालगंज लालू प्रसाद यादव का गृह जिला

गोपालगंज लालू प्रसाद यादव का गृह जिला होने के कारण, यहां राजद का मजबूत प्रभाव माना जाता है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय पर राजद और जदयू दोनों की पकड़ देखी जाती है। ऐसे में यह सीट हर चुनाव में राजद-जदयू के बीच सीधा संघर्ष का केंद्र रहती है, जबकि भाजपा का संगठनात्मक प्रभाव सीमांत इलाकों में महसूस किया जाता है।

कुल मतदाताओं की संख्या 3,62,491

2024 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या 6,04,058 है, जिसमें 3,08,476 पुरुष और 2,95,582 महिलाएं हैं। वहीं, कुल मतदाताओं की संख्या 3,62,491 है, जिसमें 1,83,726 पुरुष, 1,78,752 महिलाएं और 13 थर्ड जेंडर शामिल हैं। यहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के लगभग बराबर है, जो आने वाले चुनावों में महिला वोट बैंक की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

भोरे विधानसभा क्षेत्र इस समय जदयू के कब्जे में

भोरे विधानसभा क्षेत्र इस समय जदयू के कब्जे में है, लेकिन मतदाताओं का मूड परिवर्तनशील है। यहां के लोग विकास, सड़क, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं, लेकिन चुनाव के समय जातीय और सामाजिक समीकरण अक्सर निर्णायक साबित होते हैं। 2025 के चुनाव में मुकाबला फिर से जदयू-राजद के बीच कांटे का रहने की संभावना है।

प्रशांत किशोर ने बिहार की सियासत में नया और अनोखा प्रयोग किया

प्रशांत किशोर ने बिहार की सियासत में नया और अनोखा प्रयोग किया है जब गोपालगंज जिले के भोरे विधानसभा (सुरक्षित) से थर्ड जेंडर को उम्मीदवार बनाया है।दरअसल, जन सुराज ने भोरे विधानसभा से प्रीति किन्नर को उम्मीदवार बनाया है। प्रीति की सामाजिक कार्यों और स्थानीय जुड़ाव के कारण जनता के बीच खास पहचान है। प्रीति किन्नर मूलरूप से सीतामढ़ी जिले के सोनवर्षा प्रखंड के खाप गांव की रहने वाली हैं, लेकिन पिछले 22 वर्षों से भोरे प्रखंड के कल्याणपुर में रह रही हैं और यहां अपने सामाजिक कार्यों से खास पहचान बनाई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि वे गरीबों, वंचितों की समस्याओं को लेकर मुखर हैं। बताया जाता है कि ये महिलाओं और लड़कियों की आवाज भी उठाती रही हैं। अब तक उन्होंने 25 से अधिक आर्थिक रूप से पिछड़ी लड़कियों की शादियां करवाई हैं।

भोरे विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प

जानकारी के मुताबिक, प्रीति किन्नर पशुपालन से भी जुड़ी हैं। भोरे विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प माना जा रहा है। फिलहाल इस सीट से बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार विधायक हैं। माना जा रहा है कि जदयू एक बार फिर से उन्हें ही उम्मीदवार बनाए। ऐसे में तय है कि जनसुराज ने प्रीति किन्नर को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है।

वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के सुनील कुमार ने सीपीआई (एमएल) के जितेंद्र पासवान को केवल 462 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया था। लोजपा की पुष्पा देवी को केवल 4,520 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रही थीं। कम वोटों से जीतने वाली सीटों में भोरे भी शामिल था। दरअसल, जन सुराज ने प्रदेश के सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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