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अपना बूथ भी नहीं बचा पाए पूर्व CM गहलोत, सरदारपुरा के जिस बूथ पर डाला वोट वहां भी BJP पड़ी भारी

Rajasthan Assembly Election Result 2023 : अशोक गहलोत भले ही अपने सीट सरदारपुरा से चुनाव जीत गए हों, लेकिन उनका गढ़ कह जाने वाले जोधपुर में कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी। खुद गहलोत ने जिस बूथ पर अपना वोट डाला था, वहां भी भाजपा ने कांग्रेस को पछाड़ दिया।

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अशोक गहलोत क्यों नहीं बचा पाए अपनी ही जमीन?

Photo : Times Now Digital

Jodhpur Rajasthan Chunav Result News: राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा, मगर सबसे ज्यादा किरकिरी अशोक गहलोत की हुई है। पार्टी में बड़ा कद वाले गहलोत के गढ़ में भी भाजपा ने कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा, इतना ही नहीं सरदारपुरा सीट के जिस बूथ पर अशोक गहलोत ने मतदान किया था वहां भी कांग्रेस पर भाजपा भारी पड़ी। आपको नीचे सारा गुणा गणित समझाते हैं।

गहलोत के गढ़ में कैसे हार गई कांग्रेस?

मुख्यमंत्री रहते हुए अशोक गहलोत ने राजस्थान की जनता से तमाम वादे किए थे और ये दावा किया था इस बार 35 सालों की परंपरा टूटनी तय है। 5 साल कांग्रेस, 5 साल भाजपा वाला रिवाज तो नहीं टूटा, मगर खुद गहलोत के गढ़ में भाजपा ने सेंधमारी जरूर कर ली। गहलोत अपने गृह जिले जोधपुर को बचा पाने में विफल हो गए। भाजपा ने जोधपुर की 10 में से 8 विधानसभा सीटों पर जीत का ध्वज फहराया, तो कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई। अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा तक ने उन्हें फरेबी बता दिया और कांग्रेस की हार के लिए गहलोत को जिम्मेदार ठहरा दिया।

खुद का बूथ भी नहीं बचा पाए गहलोत

अशोक गहलोत ने सरदारपुरा सीट के बूथ संख्या 111 पर मतदान किया था, वहां भी कांग्रेस पिछड़ गई। इस बूथ पर भाजपा को 462 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के खाते में 419 वोट गए। इस बूथ पर गहलोत के प्रतिद्वंदी और भाजपा उम्मीदवार प्रो. महेंद्र सिंह राठौड़ 43 वोटों से आगे रहे। 10 साल पहले राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजों में भी गहलोत के गढ़ जोधपुर में कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी थी। उस वक्त सिर्फ सरदारपुरा से कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी, वो भी जहां से खुद गहलोत चुनाव लड़ रहे थे।

जोधपुर की किस सीट पर किसे मिली जीत?

जोधपुर जिले में चुनाव से पहले अशोक गहलोत ने लोहावट, फलोदी, शेरगढ़, लूणी, भोपालगढ़ और सूरसागर विधानसभा सीटों पर जमकर सभाएं भी की थी, लेकिन भोपालगढ़ को छोड़कर हर सीट पर कांग्रेस को भाजपा ने पटखनी दे दी।

  • बिलाड़ा सीट से भाजपा के अर्जुनराम गर्ग ने कांग्रेस के मोहनलाल कटारिया को 10 हजार 424 वोटों से हराया
  • फलोदी सीट से भाजपा के पब्बाराम बिश्नोई ने कांग्रेस के प्रकाश चंद्र छंगाणी को 10 हजार 784 वोटों से हराया
  • सूरसागर सीट से भाजपा के देवेंद्र जोशी ने कांग्रेस के शहजाद खान को 38 हजार 759 वोटों से हराया
  • लोहावट सीट से भाजपा के गजेंद्र सिंह खींवसर ने कांग्रेस के सत्यनारायण विश्नोई को 10 हजार 549 वोटों से हराया
  • भोपालगढ़ सीट से कांग्रेस की गीता बरवड़ ने भाजपा के पुखराज गर्ग को 24 हजार 298 वोटों से हराया
  • ओसियां सीट से भाजपा के भेराराम चौधरी ने कांग्रेस की दिव्या मदेरणा को 2 हजार 807 वोटों से हराया
  • लूणी सीट से भाजपा के जोगाराम पटेल ने कांग्रेस के महेंद्र सिंह विश्नोई को 24 हजार 678 वोटों से हराया
  • जोधपुर शहर सीट से भाजपा के अतुल भंसाली ने कांग्रेस की मनीषा पवार को 13 हजार 525 वोटों से हराया
  • शेरगढ़ सीट से भाजपा के बाबू सिंह ने कांग्रेस की मीना कंवर को 25 हजार 44 वोटों से हराया
  • सरदारपुरा सीट से कांग्रेस के अशोक गहलोत ने भाजपा के प्रो. महेंद्र सिंह राठौड़ को 26 हजार 396 वोटों से हराया
स्पष्ट रूप से ये कहा जाए कि राजस्थान में अशोक गहलोत का जादू फेल हो गया और खुद उनके गढ़ माने जाने वाले जोधपुर में कांग्रेस का बुराहाल हो गया। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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