Who Is Scientist Ronaldo Laishram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात' के 136वें एपिसोड में एक ऐसे शख्स का जिक्र किया था, जो आज विज्ञान और इनोवेशन के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और दुनिया भर में पहचान बना चुके हैं, फिर भी वे अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हैं और जब भी मौका मिलता है अपने गृह राज्य का सम्मान करना नहीं भूलते। बता दें यहां हम एस्ट्रोफिजिसिस्ट डॉ. रोनाल्डो लैशराम की बात कर रहे हैं। मणिपुर से आने वाले रोनाल्डो ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। बता दें रोनाल्डो जापान में काम करते हैं और वे उस टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने गैलेक्सीज (आकाशगंगाओं) के एक विशाल समूह की खोज की थी। उन्होंने नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी ऑफ जापान (NAOJ) में पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर के तौर पर एक इंटरनेशनल रिसर्च टीम का नेतृत्व किया। वे गैलेक्सी के बनने और उनके विकास (इवोल्यूशन) पर रिसर्च करते हैं।
Who Is Scientist Ronaldo Laishram: कौन हैं वैज्ञानिक रोनाल्डो लैशराम
बता दें लैशराम मणिपुर के थौबल जिले के खंगाबोक गांव के रहने वाले हैं। वह पांच भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता का नाम लैशराम महाजोन सिंह और माता का नाम लैशराम सनाहनबी देवी है। कहा जाता है कि बचपन से ही खगोल विज्ञान में उनकी काफी रुचि थी। महज 18 वर्ष की आयु में उन्होंने एक क्षुदग्रह (asteroid) की खोज की थी, जिसके लिए राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें सम्मानित भी किया था।
Ronaldo Laishram Education Qualification: कंप्यूटर साइंस में इंजीनिरिंग और जापान से पीएचडी
रोनाल्डो ने मैसूर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की है। इसके बाद उन्होंने जापान के तोहोकू यूनिवर्सिटी से से एस्ट्रोनॉमी में पीएचडी की डिग्री हासिल की। जापान में रहते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीकों, मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं पर काम किया।
मणिपुर एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की स्थापना
उन्होंने साल 2025 में अंतरिक्ष विज्ञान में गहरी रुचि रखने वालों के लिए मणिपुर एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की स्थापना भी की थी। रोनाल्डो लैशराम का मानना है कि विज्ञान का उद्देश्य केवल नई खोज करना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान तैयार करना भी है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने शोध कार्य को ऐसे क्षेत्रों से जोड़ा, जिनका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और औद्योगिक विकास में किया जा सकता है।
