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क्या होती है 'Daylight Saving'? जानिए गर्मियों में भारत और ब्रिटेन के बीच क्यों घट जाता है समय का फासला

दुनिया में कई ऐसे देश हैं, यहां साल में समय दो बार बदला जाता है, जिसमें ब्रिटेन का नाम भी शामिल है। जी हां, यहां गर्मियों के मौसम में समय बदल दिया जाता है, जिसे Daylight Saving कहते हैं और इससे भारत और ब्रिटेन के बीच समय का फासला कम हो जाता है। आइए जानते हैं क्यों?

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क्या होती है 'Daylight Saving'? (Photo - AI)

What is Daylight Saving: दुनिया के कई देशों में मौसम के साथ-साथ घड़ियों का समय भी बदल जाता है। जी हां, सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है। दुनिया में कई देशों में समय साल में दो बार बदलता है। उन देशों में ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय देश शामिल है। लेकिन सवाल यह है कि यहां समय साल में दो बार क्यों बदला जाता है? जब भारत में पूरे साल समय एक समान रहता है, तो क्यों ब्रिटेन में गर्मियों के आते ही घड़ियों की सुइयां 1 घंटा आगे कर दी जाती हैं।

बता दें कि इस व्यवस्था को 'डेलाइट सेविंग टाइम' (Daylight Saving Time - DST) कहा जाता है। इसी व्यवस्था के कारण भारत (IST) और ब्रिटेन (UK) के बीच समय का अंतर साल में दो बार बदलता है। आइए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि डेलाइट सेविंग क्या है और गर्मियों में भारत व ब्रिटेन के बीच का समय क्यों घट जाता है। आइए इस व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानें।

क्या है डेलाइट सेविंग टाइम?

Daylight Saving टाइम एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत गर्मियों के महीनों में प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश यानी Daylight का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने के लिए घड़ियों को 1 घंटा आगे बढ़ा दिया जाता है। गर्मियों के मौसम में सूरज जल्दी निकलता है और शाम को देर तक रोशनी रहती है। ऐसे में अगर घड़ियां सामान्य समय पर ही चलेंगी, तो सुबह की धूप बेकार चली जाएगी। इसलिए, इन स्थानों पर डेलाइट सेविंग लागू किया गया है। इसी के कारण लोग 1 घंटा जल्दी उठते हैं और अपने दिन की शुरुआत करते हैं। शाम के समय प्राकृतिक रोशनी का ज्यादा फायदा मिलता है। शाम को बल्ब, ट्यूबलाइट और बिजली का कम इस्तेमाल होता है, जिससे एनर्जी की बचत होती है।

जिस प्रकार गर्मियों में एक घंटा आगे बढ़ाया जाता है, उसी प्रकार जब सर्दी आती है, तो घड़ियों को वापस 1 घंटा पीछे (Standard Time पर) कर दिया जाता है। इसे "Spring Forward, Fall Back" के नियम के तौर पर याद रखा जाता है। आसान भाषा में समझे तो वसंत में 1 घंटा आगे और शरद ऋतु में 1 घंटा पीछे।

गर्मियों में भारत और ब्रिटेन के बीच क्यों कम हो जाता है समय का फासला?

भारत और ब्रिटेन के बीच गर्मियों में आने वाले समय के अंतराल को समझने के लिए सबसे पहले आपको दोनों देशों की समय प्रणालियों यानी टाइम सिस्टम के बारे में जानना जरूरी है। भारत का मानक समय IST के अनुसार चलता है। इसके अनुसार, भारत का समय पूरे साल एक ही रहता है। भारत में कभी भी घड़ी का समय नहीं बदला जाता। वहीं ब्रिटेन में समय दो बार गर्मियों और सर्दियों में बदला जाता है।

सर्दियों और गर्मियों में घंटे का अंतराल

समय के बीच अंतर के बारे में जानने के बाद आइए अब जानते हैं कि सर्दियों में और गर्मियों में भारत और ब्रिटेन के बीच कितने घंटे का अंतराल होता है -

  • सर्दियों में यानी अक्टूबर के आखिरी रविवार से मार्च के आखिरी रविवार तक ब्रिटेन 'ग्रीनविच मीन टाइम' (GMT) पर रहता है। इस दौरान भारत, ब्रिटेन से 5 घंटे 30 मिनट आगे होता है।
  • मार्च के आखिरी रविवार को ब्रिटेन में 'डेलाइट सेविंग' लागू हो जाती है, जिसे वहां BST यानी British Summer Time कहा जाता है। इसके तहत ब्रिटेन अपनी घड़ियों को 1 घंटा आगे बढ़ा देता है। चूंकि ब्रिटेन का समय 1 घंटा आगे बढ़ जाता है और भारत का समय वहीं रहता है, इसलिए दोनों देशों के बीच का समय का फासला घटकर 4 घंटे 30 मिनट रह जाता है।

भारत में क्यों डेलाइट सेविंग नहीं होता लागू?

भारत एक भूमध्य रेखा के करीब स्थित देश है। भूमध्य रेखा के पास होने के कारण गर्मियों और सर्दियों में दिन और रात की लंबाई में अंतर आता है, लेकिन यह बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। इसके विपरीत, ब्रिटेन भूमध्य रेखा से बहुत दूर है। वहां गर्मियों में दिन बहुत लंबे (16-17 घंटे) और सर्दियों में दिन बहुत छोटे (8-9 घंटे) होते हैं। इसलिए उन्हें प्राकृति रोशनी यानी डेलाइट का सही उपयोग करने के लिए घड़ियां बदलनी पड़ती हैं, जबकि भारत को इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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