केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के खिलाफ सऊदी अरब में रहने वाले एक भारतीय छात्र ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छात्र ने आरोप लगाया है कि 12वीं कक्षा की इम्प्रूवमेंट परीक्षा में शामिल होने के बावजूद उसका परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है, जिससे उसकी उच्च शिक्षा और कॉलेज प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। याचिकाकर्ता छात्र प्रणसू जिगरकुमार पटेल ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हैं। अदालत का फैसला न केवल याचिकाकर्ता बल्कि विदेशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित अन्य छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
छात्र प्रणसू जिगरकुमार पटेल (Pransu Jigarkumar Patel) का कहना है कि वह सऊदी अरब के अल जुबैल शहर से CBSE कक्षा 12 इम्प्रूवमेंट परीक्षा 2026 में शामिल हुआ था। लेकिन पश्चिम एशिया में सुरक्षा कारणों और क्षेत्रीय तनाव के चलते कुछ परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं, जिसके बाद CBSE ने प्रभावित विद्यार्थियों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना लागू की थी। इसके बावजूद उसका परिणाम जारी नहीं किया गया।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: सुरक्षा खतरे के बाद OnMark पोर्टल बाहर, अब अपनी वेबसाइट पर होगी री-चेकिंग
प्रणसू पटेल ने अदालत से मांग की है कि CBSE को तत्काल उसका परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए। वैकल्पिक रूप से उसने रद्द हुए विषयों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित कराने की भी मांग की है। याचिका के अनुसार, छात्र ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस विषयों में इम्प्रूवमेंट परीक्षा के लिए आवेदन किया था। उसने कुछ विषयों की परीक्षा दी, जबकि शेष परीक्षाएं रद्द हो गईं। छात्र का दावा है कि CBSE की विशेष मूल्यांकन नीति का लाभ उसे भी मिलना चाहिए था, लेकिन बोर्ड ने अब तक उसका परिणाम घोषित नहीं किया है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: CBSE ने बढ़ाई 12वीं के लिए री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन आवेदन की तारीख
छात्र का कहना है कि परिणाम लंबित रहने के कारण उसका बीटेक सहित अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रभावित हो रहा है और उसका एक शैक्षणिक वर्ष भी खराब हो सकता है। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हैं। अदालत का फैसला न केवल याचिकाकर्ता बल्कि विदेशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित अन्य छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
