देश में दक्षिण-पश्चिमी मानसून (Monsoon 2026) की विदाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, शनिवार 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू होने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। सामान्य तौर पर मानसून 17 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से पीछे हटना शुरू करता है। ऐसे में इस साल मानसून की विदाई लगभग दो दिन की देरी से शुरू होने की संभावना जतायी गई है।
IMD के मुताबिक, सितंबर के अंत तक उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से से मानसून के पूरी तरह विदा होने की संभावना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि देशभर में बारिश तत्काल बंद हो जाएगी। मौजूदा मौसम प्रणालियों के कारण कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।
कई राज्यों में भारी बारिश के आसार
दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे उत्तरी गुजरात के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र फिलहाल पश्चिम और मध्य भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ जुड़ी ट्रफ लाइन झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ तक फैली हुई है। इसके कारण इन क्षेत्रों में नमी पहुंचने और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।
गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। गुजरात के अन्य हिस्सों और राजस्थान में भी तेज बारिश हो सकती है। मौसम प्रणाली का असर मध्य भारत के कुछ इलाकों तक देखने को मिल सकता है।
पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़ में 17 तक मौसम तूफानी
उत्तर-पश्चिम भारत की बात की जाए तो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कल यानी बुधवार 16 और 17 सितंबर को कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। आज से 17 सितंबर तक इन राज्यों में आंधी-तूफान और बिजली चमकने की भी संभावना है।
उत्तर प्रदेश में रविवार तक बारिश का दौर
उत्तर प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता तुरंत खत्म होने के संकेत नहीं हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, 20 सितंबर तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी फिलहाल मानसून की विदाई नहीं हो रही है।
इससे साफ है कि एक तरफ पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी की शुरुआत होगी, तो दूसरी तरफ देश के कई अन्य हिस्सों में स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश का दौर भी जारी रह सकता है।
सामान्य से 14 फीसद कम बारिश
इस मानसून के सीजन में बारिश का आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है। 1 जून से 14 सितंबर तक देश में कुल बारिश सामान्य से 14 फीसद से ज्यादा कम रही है। यानी मानसून के लगभग साढ़े तीन महीनों में देश को सामान्य से काफी कम वर्षा मिली है।
कम बारिश का असर खेती, जल भंडारण और हाइड्रोपावर क्षमता पर पड़ सकता है। हालांकि, खरीफ फसलों की बुवाई पर अब तक इसका बड़ा असर नहीं दिखा है। 11 सितंबर तक खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 1.5 फीसद ही कम था। असली असर फसल की पैदावार पर अक्टूबर से कटाई शुरू होने के बाद साफ होगा।
पहले ही जतायी थी कम बारिश की आशंका
IMD ने इस साल मई में ही देश में जून से सितंबर के दौरान 'सामान्य से कम' मानसूनी बारिश का अनुमान जताया था। मौसम विभाग ने अल नीनो के प्रभाव को कमजोर मानसून की प्रमुख वजहों में शामिल किया था। अब बारिश की कमी 14 फीसदी से ज्यादा पहुंचने के बाद सीजन के अंत में भी सामान्य से कम बारिश रहने की आशंका बढ़ गई है।
