एजुकेशन

Rezang La War Memorial: 'रेजांग ला युद्ध स्मारक' क्या है? पढ़ें 1962 की अनसुनी कहानी

Rezang La War Memorial: पूर्वी लद्दाख के चुशुल सेक्टर की ऊंचाई पर स्थित Rezang La War Memorial पर आने वाले किसी भी आगंतुक की नजर सबसे पहले पास के पहाड़ के ऊपर कुछ तम्बूनुमा संरचनाओं पर पड़ती है। ये 1962 की सर्दियों में समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई पर हमलावर चीनी सेना के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा लड़े गए साहसिक युद्ध के अंतिम भौतिक अवशेष हैं, जिसमें 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 114 अधिकारियों और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी

Image

rezang la war memorial

Rezang La War Memorial in Hindi: पूर्वी लद्दाख के चुशुल सेक्टर की ऊंचाई पर स्थित Rezang La War Memorial पर आने वाले किसी भी आगंतुक की नजर सबसे पहले पास के पहाड़ के ऊपर कुछ तम्बूनुमा संरचनाओं पर पड़ती है। ये 1962 की सर्दियों में समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई पर हमलावर चीनी सेना के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा लड़े गए साहसिक युद्ध के अंतिम भौतिक अवशेष हैं, जिसमें 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 114 अधिकारियों और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। अगर आप सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको इस बारे में जरूर पढ़ना चाहिए।

इस युद्ध में 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 114 अधिकारियों और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। पास की एक पहाड़ी पर बने युद्ध स्मारक की देखरेख कर रहे जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ये वही संरचनाएं हैं जिनमें हमारी सेनाएं तैनात थीं जब उन्होंने हमलावर सैनिकों का सामना किया था। यही वह जगह थी जहां अगले बसंत में उनके शव बरामद किए गए थे।’’

पुनर्निर्मित रेजांग ला युद्ध स्मारक नवंबर 2021 में खोला गया था और यह 'भारत रणभूमि दर्शन' का हिस्सा है, जो भारत में युद्धक्षेत्र पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना और पर्यटन मंत्रालय की एक पहल है।

यह स्मारक रेजांग ला (तिब्बती भाषा में 'ला' का अर्थ दर्रा होता है) से कुछ ही दूरी पर है, जो अब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के रूप में कार्य करता है।

युद्ध स्मारक के केंद्र में 'अहीर धाम' है, जो रेजांग ला की लड़ाई में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है।

स्मारक पर प्रतिदिन सलामी गारद दी जाती है, आमतौर पर जब 100-150 आगंतुक इकट्ठा होते हैं। यह स्थल एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।

भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए वीरों की बहादुरी को याद करते हुए, अधिकारी ने बताया कि कैसे मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 114 जवानों ने 18 नवंबर, 1962 को शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान में 5,000 चीनी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

इस युद्ध में सभी भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और यह युद्ध इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया, क्योंकि इन जवानों ने कठोर मौसम का सामना करते हुए, संख्या और हथियारों के मामले में दुश्मन से कम होते हुए भी बेजोड़ बहादुरी और देशभक्ति का परिचय दिया।

(भाषा इनपुट)

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

और पढ़ें
End of Article