PoK Assembly Elections Violence: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आयोजित हो रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों के पहले चरण के दौरान भड़की हिंसा ने खूनी रूप ले लिया है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और पाक रेंजर्स द्वारा आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, मृत 19 लोगों में से 16 की पहचान कर ली गई है, जिनमें 'जम्मू एंड कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) के नेता सरदार उमर नजीर के भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं।
यह खूनी संघर्ष तब शुरू हुआ जब स्थानीय नागरिकों ने चुनावों में पाकिस्तानी सेना और पुलिस द्वारा की जा रही बड़े पैमाने पर धांधली और बूथ कैप्चरिंग का विरोध किया।
हथियार के बल पर बूथ कैप्चरिंग और फर्जी मतदान
समाहनी निर्वाचन क्षेत्र के रामलोहा मतदान केंद्र के पास उस समय भारी झड़पें शुरू हो गईं, जब स्थानीय लोगों ने मतदान कर्मियों को बंधक बनाए जाने और हथियारों के बल पर फर्जी वोट डाले जाने का आरोप लगाया। समाहनी क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें बंदूकधारी असामाजिक तत्व मतदान केंद्र से बैलेट बॉक्स लूटकर भागते नजर आ रहे हैं।
'जम्मू एंड कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) द्वारा मुजफ्फराबाद के लिए बुलाए गए मार्च के दौरान रावलाकोट में पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं। वहीं, पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पीएमएल-एन (PML-N) और पीपीपी (PPP) ने भी एक-दूसरे पर कई निर्वाचन क्षेत्रों में बूथ कैप्चरिंग और धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शरणार्थी सीटों को लेकर उपजा मुख्य विवाद
पीओके की तथाकथित 53 सीटों वाली विधानसभा में 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं। अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) की मुख्य मांग 12 शरणार्थी सीटों को खत्म करने की थी, जिसे पाक सरकार ने ठुकरा दिया। चुनाव का पहला चरण 27 जुलाई को पूरा हुआ, जबकि पूरा चुनाव तीन चरणों में 10 अगस्त तक चलना है। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि पीओके में उपजा जनआक्रोश पाकिस्तान के दशकों से जारी 'प्रशासनिक उत्पीड़न और अवैध कब्जे' का सीधा परिणाम है।
