NEET UG 2026 Controversy: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पहले नीट परीक्षा पेपर लीक मामला, फिर रिजल्ट और नॉर्मलाइज अंक को लेकर विवाद हुआ। नतीजों को लेकर विवाद कम होने के बजाए गहराता ही जा रहा है। हाल ही में एक अभ्यर्थी ने ऑनलाइन रिजल्ट पोर्टल पर अंकों में हुई भारी विसंगति (Inconsistency) को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
अभ्यर्थी का आरोप है कि रिजल्ट जारी होने के बाद महज 24 घंटे के भीतर पोर्टल पर उसके कुल अंक तीन बार बदले गए। छात्र ने बताया कि अंक 650 से घटकर अंततः मात्र 135 रह गए। छात्र ने एडवोकेट विनीत जिंदल के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कराई और परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच की मांग की गई है।
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650 से घटकर 135 पर पहुंचा स्कोर
याचिका में दी गई जानकारी के अनुसार, छात्र ने 21 जून 2026 को नीट री-एग्जाम दिया था। आंसर-की से मिलान करने के बाद उसे 620 अंक मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, 16 जुलाई को परिणाम घोषित होने पर पोर्टल पर पहले 650 अंक दिखाई दिए। कुछ समय बाद दोबारा लॉग इन करने पर यह घटकर 500 हो गए और अगले ही दिन अंतिम स्कोर कार्ड में केवल 135 अंक नजर आए।
NTA ऑफिस में दिखाई गई किसी और की OMR शीट
अंकों में अचानक गिरावट के बाद अभ्यर्थी ने ईमेल और आरटीआई (RTI) के जरिए एजेंसी से संपर्क करने का प्रयास किया। कोई स्पष्ट जवाब न मिलने पर छात्र 20 जुलाई को नई दिल्ली स्थित एनटीए कार्यालय पहुंचा। वहां कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई गई उत्तर पुस्तिका को अभ्यर्थी ने पहचानने से इनकार कर दिया। उसका दावा है कि उसे दिखाई गई OMR शीट वह नहीं है जो उसने परीक्षा केंद्र में भरी थी।
कैलकुलेशन शीट में दर्ज मिली गलत तारीख
केवल ओएमआर शीट और अंकों में गड़बड़ी के बाद रिकॉर्ड में लापरवाही का एक और मामला तब सामने आया जब एजेंसी द्वारा दी गई कैलकुलेशन शीट की जांच की गई। शीट पर परीक्षा की वास्तविक तिथि 21 जून 2026 के स्थान पर 21 जुलाई 2026 छपी हुई पाई गई। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस तरह की गलतियां डेटा की प्रामाणिकता और सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा संदेह पैदा करती हैं। छात्र ने एडवोकेट विनीत जिंदल के माध्यम से कई मांगे कोर्ट के सामने रखी है।
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याचिका में की गई मुख्य मांगें
एडवोकेट विनीत जिंदल के जरिए दायर इस याचिका में कैंडिडेट ने साफ किया है कि वह अंकों के पुनर्मूल्यांकन के बजाय ओएमआर शीट के फिजिकल वेरिफिकेशन की मांग कर रहा है। इसके साथ ही छात्र ने अदालत के समक्ष मूल फिजिकल OMR शीट पेश की जाने, सर्वर लॉग, स्कैनिंग रिकॉर्ड और मेटाडेटा जैसे सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखे जाने, किसी स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब या कोर्ट कमिश्नर से उत्तर पुस्तिका की सत्यता की जांच कराई जाए और मामले के लंबित रहने तक अभ्यर्थी को नीट यूजी 2026 काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दिए जाने की मांग की है।
