नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने अपनी उच्च स्तरीय सिलेबस कमेटी में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह कदम बीते दिनों 8वीं क्लास की किताब के एक चैप्टर पर हुए विवाद के उठाया गया। बता दें कि बीते दिनों में उच्चतम न्यायालय ने कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की टेक्सटबुक में शामिल "न्यायपालिका में भ्रष्टाचार" चेप्टर पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इस विवाद के बाद ही एनसीईआरटी द्वारा सिलेबस कमेटी में बदलाव किए जाने का फैसला लिया गया था। शिक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह और संतुलित बनाने के उद्देश्य से अब 20-सदस्यों की नई समिति का गठन किया गया है।
उच्चतम न्यायालय की फटकार और टेक्स्टबुक पर प्रतिबंध
एनसीईआरटी टेक्स्टबुक के चैप्टर पर विवाद की शुरुआत फरवरी में हुई, जब उच्चतम न्यायालय ने आठवीं कक्षा की एक किताब का स्वतः संज्ञान लिया। इस पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर कुछ अंश लिखे गए थे, जिन्हें अदालत ने अनुचित माना गया। Supreme Court की फटकार के बाद, न केवल उस चैप्टर को हटाने के निर्देश दिए गए, बल्कि संबंधित किताब की ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में उपलब्ध सभी कॉपियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया दिया गया। इसी घटना के बाद एनसीईआरटी ने फैसला लिया कि वह अपनी समिति को मजबूत बनाएगा और उसमें बदलाव करेगा।

NCERT Reconstitutes Syllabus Panel (Photo- NCERT Website)
समिति में होगी नए दिग्गजों की एंट्री
एनसीईआरटी की राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पठन-पाठन सामग्री समिति (NSTC) में अब 22 की जगह 20 सदस्य होंगे। नई समिति में देश के जाने-माने दिग्गजों को शामिल किया जाएगा। इसमें आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष रघुवेन्द्र तंवर और नेशनल लॉ स्कूल के पूर्व कुलपति आर. वेंकट राव जैसे नाम शामिल हैं। बता दें कि कमेटी के पुनर्गठन के दौरान समिति में नए लोगों को एड करने के साथ तीन पुराने सदस्यों को हटाया भी गया है। हटाए गए सदस्यों में आईआईटी गांधीनगर के पूर्व प्रोफेसर मिशेल डैनिनो और दिवंगत बिबेक देबरॉय शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य पठन सामग्री को और अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है।
तीसरी से 12वीं कक्षा तक के सिलेबस में होगा बदलाव
बता दें कि इस नई समिति के पास स्कूली शिक्षा के पूरे ढांचे को सुधारने की शक्ति होगी। यह टीम कक्षा 3 से लेकर 12वीं तक की सभी नई टेक्सटबुक को विकसित करने का काम करेगी। इसके साथ ही अगर आवश्यकता हुई तो पहली और दूसरी कक्षा की किताबों में भी जरूरत के अनुसार संशोधन किए जाएंगे, ताकि जब छात्र दूसरी से तीसरी कक्षा में जाएं, तो उन्हें पाठ्यक्रम में अचानक कोई बड़ा अंतर महसूस न हो और वह आसानी से इसे समझ और पढ़ सकें। इस पर सीनियर अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में छात्रों को दी जाने वाली जानकारी तथ्यात्मक रूप से सही हो और उसमें किसी भी संवैधानिक संस्था की गरिमा का उल्लंघन न किया गया हो।
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