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'जनता के बीच आपको बेनकाब कर देंगे', सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार, जानें क्या है पूरा मामला

Supreme Court Slams Maharashtra Government: सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में मुकदमों की धीमी सुनवाई और आरोपियों की जमानत का बेवजह विरोध करने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस शील नागू की पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारी, तो वे उसे जनता के बीच बेनकाब कर देंगे।

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सुप्रीम कोर्ट की महाराष्ट्र सरकार को खुली चेतावनी (फाइल फोटो)

Photo : PTI

Supreme Court Slams Maharashtra Government: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने आपराधिक मामलों की कछुआ चाल से हो रही सुनवाई और जेलों में बंद कैदियों की जमानत याचिका का आंख मूंदकर विरोध करने के रवैये पर महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को सरेआम चेतावनी दी है कि यदि मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो न्यायालय सरकार को जनता के बीच पूरी तरह से बेनकाब कर देगा।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ एक विदेशी नागरिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा, "हमारे पास हर दिन महाराष्ट्र से ऐसे ढेरों मामले आते हैं। राज्य सरकार (Maharashtra News) जमानत का तो पूरी ताकत से विरोध करती है, लेकिन मुकदमे की सुनवाई को समय पर पूरा कराने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती। जब हम गहराई से ऐसे मामलों की पड़ताल करते हैं, तो पुलिस के सबूत बेहद कमजोर निकलते हैं।"

चार साल में 53 बार नहीं की पेशी

अदालत के सामने जो तथ्य आए, वे चौंकाने वाले थे। अपहरण और हत्या के आरोप में बंद इस विदेशी नागरिक ने बताया कि वह पिछले चार साल से सलाखों के पीछे है। निचली अदालत में उसका मामला 86 बार तारीखों पर सूचीबद्ध हुआ, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही की वजह से उसे 53 बार कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक गंभीर चूक माना और कहा कि किसी भी आरोपी को त्वरित सुनवाई का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अदालत ने बेहद दुखी मन से कहा, "हमें यह देखकर शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि चार साल के लंबे वक्त में 34 गवाहों में से केवल दो गवाहों से ही पूछताछ हो सकी है। यह स्थिति पिछले कुछ समय से अदालत को परेशान कर रही है।"

न्यायालय ने क्या दिया आदेश?

न्यायालय ने साफ किया कि अगर राज्य सरकार किसी की जमानत का विरोध करती है, तो यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह अदालती कार्यवाही को भी सुचारू रूप से चलाए। हालांकि महाराष्ट्र सरकार के वकील ने भरोसा दिया कि अब हर तारीख पर आरोपियों को पेश किया जा रहा है, लेकिन कोर्ट ने सभी राज्यों को एक खास नीति बनाने का निर्देश दिया। पीठ ने कड़ा आदेश जारी करते हुए कहा कि अब से इस मामले में हर हफ्ते कम से कम चार गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और इसका पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश किया जाए।

monu jha
मोनू झा author

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कं... और देखें

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