भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के प्रोफेसर महेश काकडे को गणित के क्षेत्र में प्रतिष्ठित 2026 रामानुजन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार अल्जेब्रिक नंबर थ्योरी में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) और इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (IMU) की ओर से हर साल विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों को यह पुरस्कार दिया जाता है। महेश काकडे को मिला यह सम्मान भारतीय गणितीय शोध के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत में हो रहे उच्चस्तरीय गणितीय शोध को एक बार फिर पहचान मिली है।
बता दें कि रामानुजन पुरस्कार की शुरुआत 2005 में हुई थी। यह पुरस्कार 45 वर्ष से कम उम्र के ऐसे गणितज्ञों को दिया जाता है, जिन्होंने विकासशील देशों में रहते हुए गणित के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध किया हो। पुरस्कार के साथ 10,000 अमेरिकी डॉलर की राशि भी दी जाती है।
महेश काकडे को विशेष रूप से नॉन-कम्यूटेटिव इवासावा थ्योरी में उनके मौलिक शोध परिणामों और ग्रॉस-स्टार्क तथा ब्रुमर-स्टार्क अनुमान (Conjectures) पर किए गए उल्लेखनीय काम के लिए यह सम्मान मिला है। ICTP के अनुसार, उनके शोध का संबंध गणित की उन बेहद जटिल समस्याओं से है, जिनका आधुनिक नंबर थ्योरी में काफी महत्व है। उनके काम के कुछ परिणाम प्रसिद्ध गणितज्ञ डेविड हिल्बर्ट की 12वीं समस्या से भी जुड़े हैं।
नंबर थ्योरी गणित की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसमें पूर्णांकों, अभाज्य संख्याओं और उनके बीच मौजूद गणितीय संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इसके कई शोध क्षेत्र आधुनिक क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों से भी जुड़े हैं। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, काकडे का शोध स्टार्क अनुमान और एल-फंक्शन से जुड़े महत्वपूर्ण गणितीय सवालों पर केंद्रित रहा है।
महेश काकडे ने भारत के इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट से गणित में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2008 में यहीं से शुद्ध गणित में पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्होंने गणित के क्षेत्र में शोध को आगे बढ़ाया और वर्तमान में IISc में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
