How Much Cost To Conduct Neet Exam: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG लीक होने के चलते रद्द कर दी गई है। यह परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपना रजिस्ट्रेश करवाया था। वहीं अब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने नई परीक्षा की तारीख 21 जून घोषित कर दिया है। इसके लिए 14 जून को एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे। ऐसे में अब अधिकतर लोगों के मन सवाल है कि एनटीए को दोबारा नीट की परीक्षा करवाने में कितना खर्चा आएगा। CLEAN करो NEET के इस मुहिम में आप जान सकते हैं कि री-एग्जाम कराने में सरकार का कितना नुकसान होगा।
NEET का एग्जाम कराने में कितना खर्च होता है
आपके मन में भी सवाल होगा कि नीट एग्जाम करवाने में सरकार का कितना खर्चा आता है। बता दें 20 वर्षों से IIT, NEET और बोर्ड परीक्षा के छात्रों को कोचिंग दे रहे अमित दीक्षित (M-tech, IIT-DELHI/GATE- AIR 1) ने टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत में बताया कि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (National Eligibility cum Entrance Test) की परीक्षा करवाने में लगभग 300 करोड़ रुपये का खर्च आता है। बता दें इस परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं। देशभर में हजारों परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। कई राज्यों और शहरों में एक साथ परीक्षा आयोजित होती है। सुरक्षा, निगरानी और ट्रांसपोर्टेशन का बड़ा नेटवर्क तैयार करना पड़ता है। ऐसे में इसमें करोड़ों का खर्च आना कोई बड़ी बात नहीं है।
आवेदन शुल्क से कितने रुपये कलेक्ट होते हैं
रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2018 में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बड़ी परीक्षाओं के आयोजन पर करीब 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। हालांकि नीट जैसी परीक्षा के लिए छात्रों से आवेदन शुल्क भी ज्यादा लिया जाता है। सामान्य वर्ग (General Category) के लिए आवेदन फीस 1700 रुपये, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग (OBC, EWS) के लिए 1600 रुपये और एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी (SC, ST, PWD) वर्ग के लिए 1000 रुपये आवेदन शुल्क तय किया गया था। यहां कुल 22 लाख से ज्यादा आवेदन किए गए थे। ऐसे में एनटीए के पास करीब 300 से 350 करोड़ रुपये कलेक्ट किए होंगे।
पेपर लीक होने पर सरकार का कितना नुकसान
वहीं अगर इतनी बड़ी परीक्षा लीक हो जाए तो सरकार का काफी नुकसान होता है। इसके लिए नए प्रश्न पत्र तैयार करने पड़ेंगे, दोबारा प्रिंटिंग करनी होगा, नए एडमिट कार्ड तैयार किए जाएंगे, एग्जाम सेंटर्स चयनित होंगे और परीक्षा निरीक्षक की नियुक्ति की जाएगी। एक्पर्ट्स की मानें तो दोबारा करीब 250 से 300 करोड़ रुपये का खर्चा होगा।
