पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में रहने वाले CBSE कक्षा 12 के छात्रों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह पश्चिम एशिया के उन निजी CBSE कक्षा 12 छात्रों के लिए एक नीति तैयार कर रही है, जिनके परिणाम परीक्षा रद्द होने के कारण रोके गए हैं। सरकार के अनुसार इन छात्रों के हितों की रक्षा के लिए समाधान तलाशा जा रहा है। दरअसल, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा कारणों से कई परीक्षाएं रद्द होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के परिणाम अब तक जारी नहीं हो सके हैं। ऐसे छात्रों के रिजल्ट को CBSE ने "रिजल्ट लेटर (RL)" श्रेणी में रखा है, जिसके चलते उनके कॉलेज दाखिले और आगे की पढ़ाई पर अनिश्चितता बनी हुई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि परिणाम लंबित रहने से छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। विश्वविद्यालयों में दाखिले, छात्रवृत्तियों और अन्य प्रवेश प्रक्रियाओं की समय-सीमा लगातार नजदीक आ रही है, ऐसे में जल्द फैसला आवश्यक है। छात्रों की ओर से मामले के शीघ्र और समयबद्ध समाधान की मांग की गई। गौरतलब है कि क्षेत्रीय तनाव के चलते CBSE ने बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कई बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। इसके बाद हजारों भारतीय छात्रों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि उनके अंतिम अंक और परिणाम किस आधार पर घोषित किए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 22 जून 2026 को निर्धारित की है। अदालत प्रस्तावित नीति और CBSE द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर विचार करेगी। अब खाड़ी देशों में रहने वाले हजारों CBSE छात्रों और उनके अभिभावकों की नजर 22 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि अदालत और सरकार की पहल से छात्रों के रिजल्ट को लेकर बनी अनिश्चितता जल्द समाप्त हो सकेगी।
इस बीच, सऊदी अरब के एक छात्र द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही CBSE को नोटिस जारी कर चुका है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि यह छात्रों के करियर और प्रवेश का मामला है, इसलिए समाधान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
