Dhiraj Bommadevara Gold: भारतीय तीरंदाजी को अपना नया हीरो मिल गया है। धीरज बोम्मदेवर ने मेक्सिको के साल्टिलो में खेले गए आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल 2026 में इतिहास रच दिया है। धीरज इस सीजन-एंडिंग टूर्नामेंट में इंडिविजुअल गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं। फाइनल में उन्होंने जापान के नाकानिशी जुंया को शूट-ऑफ में 6-5 से हराकर खिताब जीता। धीरज के इस ऐतिहासिक गोल्ड के बाद उनके पिता बोम्मदेवर श्रवण कुमार की आंखें नम हो गईं। उन्होंने ANI से कहा, "जब धीरज वर्ल्ड चैंपियन बना तो हम बेहद खुश थे। इस गोल्ड के पीछे सालों की मेहनत है। वह रोज 6 से 7 घंटे प्रैक्टिस करता था। उसने 2006 में सफर शुरू किया था और 19 साल बाद भारत ने वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है।"
सांस रोक देने वाला था फाइनल मुकाबला
परिवार के सदस्य चंद्र प्रकाश ने भी धीरज के बचपन को याद किया। उन्होंने कहा, "धीरज बचपन से ही असाधारण बच्चा था। उसमें शुरू से ही डेडिकेशन और डिसिप्लिन था। खेलों के प्रति उसका जुनून अलग ही था। उसके माता-पिता ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।" फाइनल मुकाबला सांसें रोक देने वाला था। 5 सेट तक स्कोर 5-5 से बराबर था। पहला सेट 28-28 से टाई रहा। दूसरा सेट जापानी तीरंदाज ने 29-28 से जीता, तीसरा धीरज ने 29-28 से वापस लिया। चौथे सेट में नाकानिशी ने 30-28 से बढ़त बनाई। पांचवें सेट में धीरज को जीतना ही था और उन्होंने दबाव में 28-27 से सेट जीतकर शूट-ऑफ कराया। शूट-ऑफ में धीरज ने 10 का परफेक्ट शॉट लगाया जबकि जापानी खिलाड़ी 9 पर रह गए।
इंडिविजुअल टाइटल जीतने वाले दूसरे भारतीय
इस जीत के साथ धीरज डोला बनर्जी के बाद वर्ल्ड कप फाइनल में इंडिविजुअल टाइटल जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। डोला ने 2007 में दुबई में महिला रिकर्व में गोल्ड जीता था। साल्टिलो में धीरज भारत के इकलौते प्रतिनिधि थे और उनका सफर शानदार रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ओलंपिक मेडलिस्ट बर्किम ट्यूमर को 7-1 से हराया और सेमीफाइनल में दो बार के ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट जीन-चार्ल्स वालाडोंट को भी 7-1 से मात दी।
