उम्र के इस पड़ाव पर जहां कई लोग आराम की जिंदगी चुन लेते हैं, वहीं गाजियाबाद की 63 वर्षीय शिक्षिका डॉ. रेनू त्रिपाठी आज भी बच्चों को विज्ञान पढ़ाने के नए-नए तरीके तलाश रही हैं। डॉ. रेनू त्रिपाठी ने वर्ष 1987 में अपने करियर की शुरुआत की थी। विज्ञान विषय की शिक्षिका के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ काम किया, लेकिन समय के साथ खुद को तकनीक से जोड़ा। उनकी मेहनत, नवाचार और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। डॉ. रेनू त्रिपाठी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है।
वर्तमान में वह गाजियाबाद के विजय नगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में विज्ञान पढ़ाती हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान करीब 26 वर्षों का है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 5 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित करेंगी। इस वर्ष देशभर से 48 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। उत्तर प्रदेश से रेनू त्रिपाठी समेत तीन शिक्षकों को इस सम्मान के लिए चुना गया है।
पहले भी मिल चुका है सम्मान
डॉ. रेनू त्रिपाठी को इससे पहले भी शिक्षा के क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन उनके वर्षों के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान है।
यूट्यूब से बनाई पहचान
रेनू त्रिपाठी की खासियत यह है कि उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई को सिर्फ किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रखा। डिजिटल दौर में उन्होंने YouTube, ऑनलाइन प्रेजेंटेशन और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर विद्यार्थियों तक पढ़ाई पहुंचाई।
12 किताबें और कई रिसर्च पेपर
शिक्षण के साथ-साथ डॉ. रेनू त्रिपाठी ने लेखन के क्षेत्र में भी काम किया है। उन्होंने विज्ञान विषय पर 12 किताबें लिखी हैं और कई रिसर्च पेपर भी तैयार किए हैं। उनका मानना है कि विज्ञान को केवल पढ़ने के बजाय प्रयोग और गतिविधियों के जरिए समझना ज्यादा प्रभावी है। वह स्मार्ट बोर्ड, PPT, टीचिंग-लर्निंग मटीरियल और स्कूल के बॉटनिकल गार्डन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करके छात्राओं को विज्ञान समझाती हैं।
