देश में इन दिनों मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में अब वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी एंट्री मार ली है। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया और पूरी तरह से इसे अव्यावहारिक बताया।
पूरा देश कह रहा लीक लेकिन NTA का इनकार
नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के मामले पर बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने सरकार और जांच एजेंसियों के बयानों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति समझ से परे है कि एक तरफ जहां पूरा देश और प्रभावित छात्र कह रहे हैं कि पेपर लीक हुआ है, वहीं दूसरी ओर एनटीए लगातार इस बात से इनकार कर रहा है कि पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने कहा शिक्षा मंत्रालय की नीति पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि अगर एनटीए के दावों के अनुसार, पेपर लीक नहीं हुआ था, तो फिर सरकार दोबारा परीक्षा क्यों आयोजित करवा रही है। उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया साफ दिखाता है कि सिस्टम के भीतर कुछ न कुछ गलत हुआ है, जिसे छिपाने की कोशिश की जा रही है।
CBSE का OSM सिस्टम
सीबीएसई की कॉपियों को ऑनलाइन चेक करने के लिए इस साल लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर भी कांग्रेस नेता ने कई तथ्य सामने रखे। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कोई नई नहीं है, बल्कि इससे पहले भी दो बड़े स्तरों पर यह बुरी तरह फेल हुई है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले इसका प्रयोग साल 2014 में हुआ था। उसके बाद इसे अव्यावहारिक और अनुपयोगी पाकर छोड़ दिया गया था। दूसरी बार इसे 2017 में मुंबई यूनिवर्सिटी ने अपनी कॉपियों की जांच के लिए लागू किया। वहां भी यह प्रयोग बुरी तरह फेल रहा और विश्वविद्यालय को इसे अव्यावहारिक मानना पड़ा। अब सीबीएसई ने इसका प्रयोग किया।
छात्रों के भविष्य को प्रयोगशाला न बनाए सरकार
दिग्विजय सिंह ने आक्रोश जताते हुए पूछा कि जब यह डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली अतीत में दो बार अलग-अलग मौकों पर पूरी तरह फेल साबित रही है, तो क्यों इस साल पूरे देश के सीबीएसई छात्रों के भविष्य के साथ यह तीसरा प्रयोग किया गया। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा मंत्रालय को इस तरह के अव्यावहारिक फैसले तुरंत रोकने चाहिए, क्योंकि इससे देश के करोड़ों युवाओं का करियर दांव पर लग जाता है।
