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दुनिया के वे देश जहां एक साथ लागू हैं दो Time Zone, जानें कैसे चलता है वहां का समय

Countries with Two Time Zones in world: दुनिया में कई देशों में एक ही टाइम जोन है, तो वहीं कई देशों में 3, 4 और 11 तक टाइम जोन है। लेकिन आज हम उन देशों की बात करेंगे, जहां केवल दो टाइम जोन हैं। आइए जानते हैं।

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दुनिया के वे देश जहां एक साथ लागू हैं दो Time Zone (Photo - AI)

Countries with Two Time Zones in world: समय का उचित प्रबंधन किसी भी देश की व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की सबसे पहली शर्त है। भारत में हम पूरे देश के लिए केवल एक ही मानक समय (IST) का पालन करते हैं, लेकिन दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिनका भौगोलिक विस्तार इतना अधिक है कि वहां एक नहीं, बल्कि दो या उससे अधिक टाइम जोन (Time Zones) लागू हैं। ऐसे विशाल भूभाग वाले देशों में घड़ी की सुइयां एक ही समय पर अलग-अलग वक्त दिखाती है। ऐसे देशों में नागरिकों की दिनचर्या, सरकारी कामकाज और यातायात का संचालन विशेष वैज्ञानिक तथा प्रशासनिक नियमों के तहत किया जाता है। आइए आज आपको ऐसे देशों के बारे में बताएं, जहां दो टाइम जोन है। यूपीएससी, एसएससी और कई अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए जानना जरूरी है। आइए आपको उन देशों के बारे में बताएं, जहां एक नहीं बल्कि दो टाइम जोन है।

क्यों पड़ती है एक से अधिक टाइम जोन की आवश्यकता?

पृथ्वी अपनी धुरी पर 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है, जिसका सीधा अर्थ है कि पृथ्वी प्रति घंटा 15 डिग्री देशांतर (Longitude) को पार करती है। जब किसी देश का भौगोलिक विस्तार पूर्व से पश्चिम दिशा में बहुत अधिक होता है, तो देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में घंटों का अंतर आ जाता है। यदि ऐसे बड़े देशों में केवल एक ही टाइम जोन रखा जाए, तो एक हिस्से में दोपहर के 12 बजे तेज धूप होगी, जबकि दूसरे हिस्से में उसी समय अंधेरा या ढलता हुआ सूरज दिखेगा। इस प्राकृतिक असंतुलन और व्यावहारिक समस्या से बचने के लिए देशों को अलग-अलग समय क्षेत्रों यानी टाइम जोन में विभाजित किया जाता है।

दो टाइम जोन वाले राज्य

दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां दो से अधिक टाइम जोन है। आइए जानते हैं -

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो: यह पूर्व से पश्चिम तक एक बड़े इलाके में फैला है। इसके पश्चिमी हिस्से में वेस्ट अफ्रीका टाइम (UTC+1) और पूर्वी हिस्से में सेंट्रल अफ्रीका टाइम (UTC+2) का इस्तेमाल होता है।

इक्वाडोर: मुख्य ज़मीन पर इक्वाडोर टाइम (UTC-5) का इस्तेमाल होता है, जबकि इसके दूर स्थित गैलापागोस द्वीप समूह UTC-6 के हिसाब से एक घंटा पीछे चलते हैं।

कजाकिस्तान: कजाकिस्तान लंबे समय तक 2 टाइम जोन (UTC+5 और UTC+6) में विभाजित रहा है। यद्यपि प्रशासनिक सुगमता के लिए हाल ही में उसने देश को एक ही समय क्षेत्र में समेकित करने की पहल की है, फिर भी इसका भौगोलिक विस्तार दो बड़े क्षेत्रों में फैला हुआ है।

मंगोलिया: अपने विशाल घास के मैदानों और रेगिस्तानी इलाकों में दो स्टैंडर्ड टाइम ज़ोन (UTC+7 और UTC+8) का इस्तेमाल करता है।

फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया: यह समुद्र के एक बड़े हिस्से में फैला है और इसे UTC+10 (याप और चूक) तथा UTC+11 (पोनपेई और कोसरे) में बांटा गया है।

पुर्तगाल: मुख्य पुर्तगाल (UTC+0) के साथ-साथ अपने स्वायत्त द्वीप क्षेत्र, अज़ोरेस (UTC-1) को मिलाकर दो टाइम ज़ोन का इस्तेमाल करता है।

स्पेन: मुख्य स्पेन सेंट्रल यूरोपियन टाइम (UTC+1) का पालन करता है, जबकि दूर स्थित कैनरी द्वीप समूह पश्चिम में हैं और वेस्टर्न यूरोपियन टाइम (UTC+0) का पालन करते हैं।

नीदरलैंड: यूरोप में सेंट्रल यूरोपियन टाइम (UTC+1) पर चलता है, लेकिन इसके कैरिबियन द्वीप क्षेत्र अटलांटिक स्टैंडर्ड टाइम (UTC-4) का इस्तेमाल करते हैं।

दो टाइम जोन में समय के संचालन के नियम व व्यवस्था

अलग-अलग समय क्षेत्रों वाले देशों में जनजीवन और सेवाओं को सुचारू रखने के लिए कुछ खास नियम अपनाए जाते हैं। उसके पीछे की मुख्य वजह प्रशासनिक और फाइनेंशियल रीजन है। बैंक शेयर बाजार और स्थानीय सरकारी कार्यालय अपने-अपने संबंधित टाइम जोन के अनुसार ही काम करते हैं। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर की घोषणाओं या बजट भाषणों के लिए देश के बेसड स्टैंडर्ड टाइम का उल्लेख किया जाता है।

इसकी दूसरी वजह परिवहन और एयरलाइंस की टाइमटेबल है। इसमें एयरलाइंस और रेलवे सेवाएं बेहद सटीक नियमों का पालन करती हैं। यात्रियों के टिकटों पर हमेशा प्रस्थान स्थल का स्थानीय समय और आगमन स्थल का स्थानीय समय स्पष्ट रूप से दर्ज होता है, ताकि समय को लेकर कोई भ्रम न रहे।

तीसरा कारण डेलाइट सेविंग टाइम (DST) का नियम है। कुछ देशों में गर्मियों के दौरान सूर्य के प्रकाश का अधिकतम लाभ उठाने के लिए घड़ियों को 1 घंटा आगे कर दिया जाता है। सर्दियों में घड़ियों को वापस 1 घंटा पीछे कर सामान्य समय पर लाया जाता है।

दो टाइम जोन के लाभ और व्यावहारिक चुनौतियां

जब किसी राज्य में दो टाइम जोन होते हैं को उनके फायदे के साथ कई चुनौतियां भी सामने आती हैं। स्थानीय आबादी की दिनचर्या प्राकृतिक सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ पूरी तरह मेल खाती है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है और लोगों की कार्यकुशलता में सुधार होता है। एक ही देश में रहने वाले लोगों के बीच बिजनेस मीटिंग, फोन कॉल और लाइव टीवी शो के समय को लेकर अक्सर असमंजस और भ्रम की स्थिति बनी रहती है। दो टाइम जोन की यह व्यवस्था यह साबित करती है कि प्रकृति के भौगोलिक नियमों और मानव निर्मित प्रशासनिक प्रणालियों के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाता है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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