CBSE Re-evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर छात्रों की शिकायत दूर करते हुए कुछ जानकारी साझा की है। बोर्ड ने बताया कि जिन पेपर में आंतरिक विकल्प (Internal option) होते हैं, वहां अगर कोई छात्र तय संख्या से ज्यादा सवाल हल कर देता है तो उसे नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। ऐसे मामलों में सिस्टम उन सभी उत्तरों को जांचता है और सबसे ज्यादा अंक वाला उत्तर ही फाइनल रिजल्ट में जोड़ा जाता है।
कई छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपी मिलने के बाद देखा कि मार्किंग शीट पर लिखे नंबर और फाइनल रिजल्ट में अंतर है। इसी को लेकर CBSE ने पूरी प्रक्रिया समझाई है। बोर्ड के मुताबिक, जब कोई छात्र एस्ट्रा आंसर करता है तो मूल्यांकन के समय उन सबका नंबर दिया जाता है। लेकिन रिजल्ट बनाते वक्त केवल वही आंसर काउंट होता है, जिसमें छात्र को सबसे ज्यादा अंक मिले हों। बाकी उत्तर को आंसर शीट में स्टार (*) लगाकर अलग कर दिया जाता है, ताकि छात्र आसानी से समझ सकें कि कौन-सा नंबर फाइनल में शामिल हुआ है।
2 जून से चल रहा है री-वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन
छात्रों के लिए री-वेरिफिकेशन और cbse re verification 2026 का पोर्टल 2 जून 2026 से शुरू हो चुका है। 6 जून 2026 तक छात्र ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सुविधा सिर्फ उन्हीं स्टूडेंट्स के लिए है जिन्होंने पहले अपनी कॉपी की स्कैन कॉपी ले ली है।
कितनी है फीस
CBSE ने शुल्क भी तय कर दिया है। अगर छात्र अपनी कॉपी में कोई गलती चेक कराना चाहते हैं तो एक आंसर शीट के 100 रुपये देने होंगे। वहीं किसी खास सवाल का दोबारा मूल्यांकन कराने के लिए 25 रुपये प्रति सवाल लगेगा। पेमेंट सिर्फ ऑनलाइन होगा।
इस प्रक्रिया के तहत छात्र मिसिंग पेज, सप्लीमेंट्री शीट न मिलना, स्कैनिंग में दिक्कत, धुंधले पेज, मैप या ग्राफ के नंबर न चढ़ने जैसी तकनीकी समस्याओं की जांच करा सकते हैं। साथ ही वे किसी एक या एक से ज्यादा सवालों का दोबारा मूल्यांकन भी करवा सकते हैं।बोर्ड ने सलाह दी है कि छात्र वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए एक-एक आवेदन ही करें और फॉर्म भरते समय सवाल नंबर और पेज नंबर सही-सही भरें। इससे प्रक्रिया में देरी या गलती की गुंजाइश कम रहेगी।
