अध्यात्म

मोती भूलकर भी न पहने इन 4 राशियों के लोग, फायदे की जगह होने लगेगा नुकसान

Who Should Wear Pearl Gemstone: रत्न और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर कोई व्यक्ति मोती रत्न को नहीं पहन सकता है। कुछ ऐसी राशियां हैं, जिनके लोगों के लिए मोती पहनना शुभ नहीं माना जाता है।

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Who Should Wear Pearl Gemstone किनको मोती नहीं पहनना चाहिए

Who Should Wear Pearl Gemstone: रत्न शास्त्र में मोती को चंद्रमा का प्रतिनिधि माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं, मानसिक शांति, संवेदनशीलता, माता, सुख-सुविधा और मानसिक ग्रहणशीलता से जुड़ा ग्रह है। इसी वजह से जब कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो और वह शुभ भावों का स्वामी हो, तब कई ज्योतिषी मोती धारण करने की सलाह देते हैं।

मगर इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति मोती पहन सकता है। कुछ लोगों के लिए मोती पहनना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि मोती को कभी भी फैशन के लिए धारण नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं किन लोगों को मोती धारण करने से बचना चाहिए।

चंद्रमा से है मोती का संबंध

मोती का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। इस कारण जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा शुभ होकर कमजोर हो, उसके लिए मोती उपयोगी माना जा सकता है। वहीं, अगर चंद्रमा पहले से बहुत मजबूत है या कुंडली में वह ऐसे भावों का स्वामी है जिन्हें मजबूत करना उचित नहीं माना जाता है, तो बिना विचार किए मोती पहनना सही नहीं है। ज्योतिष में किसी रत्न का मुख्य सिद्धांत यही है कि वह संबंधित ग्रह को मजबूत करता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोती किनको पहनना चाहिए।

इन राशि वालों को नहीं पहनना चाहिए मोती

रत्न संबंधी प्रचलित वैदिक नियमों में मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ लग्न के लोगों को मोती बिना कुंडली देखे नहीं पहनना चाहिए। इसका कारण केवल ग्रहों की मित्रता नहीं, बल्कि चंद्रमा द्वारा संभाले जाने वाले भाव भी हैं। मिथुन में चंद्रमा दूसरे भाव, कन्या में 11वें, मकर में 7वें और कुंभ में छठे भाव का स्वामी बनता है। इस कारण इन लग्नों वाले व्यक्ति को मोती का फैसला पूरी कुंडली देखकर करना चाहिए। हालांकि, सिर्फ राशि देखकर किसी को मोती के लिए योग्य या अयोग्य घोषित करना सही तरीका नहीं है क्योंकि, एक ही लग्न की दो कुंडलियों में चंद्रमा की स्थिति अलग होने पर परिणाम भी अलग हो सकते हैं।

चंद्रमा हो मजबूत तो मोती से रहें दूर

अगर कुंडली में चंद्रमा स्वराशि कर्क में, उच्च राशि वृषभ में या किसी अच्छे केंद्र-त्रिकोण भाव में बहुत मजबूत स्थिति में हो, तो बिना जरूरत मोती धारण करना कई ज्योतिषीय परंपराओं में उचित नहीं माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि रत्न ग्रह की शक्ति को बढ़ाता है और अगर ग्रह पहले से ही पर्याप्त मजबूत है तो उसे और बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि मजबूत चंद्रमा वाला हर व्यक्ति मोती पहन ही नहीं सकता है। अगर कुंडली में कोई विशेष योग, दशा या चिकित्सकीय ज्योतिषीय परामर्श हो तो फैसला बदल सकता है।

चंद्रमा राहु या केतु से हो पीड़ित

कुंडली में चंद्रमा के साथ राहु या केतु की युति या चंद्रमा पर इनकी मजबूत दृष्टि, मानसिक उलझन और ग्रहण जैसी स्थितियां बनाती है। ऐसी कुंडली में केवल यह देखकर कि चंद्रमा कमजोर है, मोती पहनना सही नहीं है। यहां पर पहले यह देखना चाहिए कि चंद्रमा पर ग्रहण प्रभाव क्यों बना है और कुंडली में वह किस भाव का स्वामी है। रत्न उस ग्रह को मजबूत करता है, इसलिए गलत निर्णय लेने के बजाय पूरी कुंडली का संतुलन देखना जरूरी है।

चंद्रमा नीच राशि में हो तो कुछ मामलों में मोती करें अवॉइड

चंद्रमा की नीच राशि वृश्चिक है। ऐसे में ये जरूरी नहीं है कि वृश्चिक में चंद्रमा वाली कुंडली के लोगों को मोती फायदा ही देगा। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि चंद्रमा किस भाव में है और उसका स्वामी कौन है, किन ग्रहों के साथ है, उस पर कौन-सी दृष्टि है और वर्तमान महादशा-अंतरदशा क्या है। इन सब चीजों को देखने के बाद ही फैसला करना चाहिए।

मकर और कुंभ लग्न में रखें विशेष सावधानी

मकर लग्न में चंद्रमा 7वें भाव का स्वामी होता है, जबकि कुंभ लग्न में वह 6वें भाव का स्वामी बनता है। इसी वजह से इन दोनों लग्नों की कुंडली वाले व्यक्ति को मोती को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वैदिक ज्योतिष में इन्हें मोती के लिए कम अनुकूल माना गया है। मकर लग्न में यदि चंद्रमा मजबूत करने से 7वें भाव से जुड़े विषयों को बढ़ावा मिलता है, तो परिणाम हमेशा व्यक्ति की अपेक्षा के अनुसार हों, यह जरूरी नहीं है। कुंभ लग्न में छठे भाव के स्वामी चंद्रमा को मजबूत करना भी बिना व्यक्तिगत कुंडली देखे उचित नहीं माना जाता है।

वृषभ और तुला लग्न में रखें ध्यान

वृषभ लग्न में चंद्रमा तीसरे भाव का स्वामी बनता है और तुला लग्न में दशम भाव का स्वामी है। इस कारण दोनों लग्नों के लिए मोती का परिणाम एक जैसा नहीं होगा। तुला लग्न में चंद्रमा कर्म भाव यानी 10वें भाव का स्वामी होने के कारण करियर के विषय में उपयोगी हो सकता है, लेकिन केवल लग्न देखकर मोती नहीं पहनना चाहिए। चंद्रमा किस राशि और भाव में बैठा है, उसकी दशा क्या है और शुक्र के साथ उसका संबंध कैसा है, ये बातें महत्वपूर्ण होंगी। कुछ परंपराओं में तुला लग्न को मोती के लिए सावधानी वाली श्रेणी में रखा जाता है।

सूर्य, शनि, राहु या केतु के साथ चंद्रमा की स्थिति जरूर देखें

मोती पहनने से पहले चंद्रमा की युति और ग्रह दृष्टि का विश्लेषण करना भी जरूरी है। जैसे अगर चंद्रमा पर शनि का बहुत मजबूत प्रभाव है या वह राहु-केतु के साथ है, तो सिर्फ चंद्रमा को मजबूत करने के लिए मोती पहनना उचित है या नहीं, इसका निर्णय पूरी कुंडली देखकर करना चाहिए।

किन राशि वालों के लिए अच्छा होता है मोती पहनना

परंपरागत ज्योतिषीय दृष्टि से कर्क और वृश्चिक लग्न में मोती की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है, क्योंकि कर्क में चंद्रमा लग्नेश और वृश्चिक में भाग्येश होता है। मेष लग्न में चंद्रमा चौथे भाव का स्वामी और मीन लग्न में पंचम भाव का स्वामी बनता है, इसलिए इन लग्न वाले मोती पहन सकते हैं। हालांकि, अगर पूरी कुंडली देखकर इसका फैसला लिया जाए तो ज्यादा अच्छा होता है।

क्या चंद्र राशि देखकर मोती पहन सकते हैं

इसका जवाब है नहीं, केवल चंद्र राशि देखकर मोती पहनना सही तरीका नहीं है। रत्न का निर्णय मुख्य रूप से लग्न, ग्रह के भाव स्वामित्व, उसकी स्थिति, बल, युति, दृष्टि और चल रही दशा के आधार पर किया जाना चाहिए। यही वजह है कि एक ही चंद्र राशि वाले दो लोगों को मोती पहनने की अलग-अलग सलाह मिल सकती है।

क्या होती है चंद्र और लग्न राशि

कुंडली के लग्न चार्ट में जो भी नंबर पहले भाव लिखा होता है, वह लग्न राशि का नंबर होता है। जैसे अगर 1 लिखा है तो मेष, 2 लिखा है तो वृषभ, मिथुन राशि का नंबर 3, कर्क का 4, सिंह का 5, कन्या का 6, तुला का 7, वृश्चिक का 8, धनु का 9, मकर का 10, कुंभ का 11 और मीन का 12 नंबर होता है। वहीं, चंद्र राशि वो होती है, जिस राशि में चंद्रमा लग्न कुंडली में मौजूद हो।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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