अध्यात्म

September Sangrand 2026: सितंबर 2026 में संग्रांद कब है, जानें अस्सू महीने की शुरुआत किस तारीख से होगी

September Sangrand 2026 Date: सितंबर में संग्रांद किस तारीख है। यहां से नोट करें सही डेट। साथ ही जानें कि जानें कि इस संग्रांद के साथ नानकशाही कैलेंडर का कौन सा महीना आरंभ होगा और इसका महत्व।

Image

सितंबर में संग्रांद कब है 2026, इस तारीख से कौन सा महीना शुरू होगा

September Sangrand 2026 Date: सितंबर 2026 में संग्रांद की तारीख देखना चाहते हैं तो इसकी जानकारी आपको दे रहे हैं। सितंबर 2026 में संग्रांद 17 तारीख को गुरुवार के दिन पड़ेगी। साथ ही इस दिन से नानकशाही संवत 558 के अस्सू महीने की शुरुआत होगी। पंजाबी कैलेंडर में यह तारीख 01 अस्सू 558 होगी। संग्रांद पर गुरुद्वारों में संगत जुटती है। गुरबाणी कीर्तन और अरदास की जाती है। श्रद्धालु नए महीने की शुरुआत गुरु का आशीर्वाद लेकर करते हैं।

सितंबर 2026 में संग्रांद कब है

साल 2026 में सितंबर महीने की संग्रांद 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इसे अस्सू की संग्रांद या Assu Di Sangrand कहा जाएगा।

सितंबर संग्रांद 2026 तारीख और दिनविवरण
संग्रांद की तारीख17 सितंबर 2026
दिनगुरुवार
पंजाबी महीनाअस्सू
नानकशाही तारीख01 अस्सू 558
अगली संग्रांद17 अक्टूबर 2026, शनिवार

संग्रांद का क्या अर्थ है

संग्रांद पंजाबी देसी महीने का पहला दिन होता है। आसान भाषा में इसे नए महीने की शुरुआत कहा जा सकता है। हर संग्रांद के साथ पंजाबी कैलेंडर का नया महीना आरंभ होता है।

सिख परंपरा में इस अवसर को केवल कैलेंडर बदलने की तारीख नहीं माना जाता। यह बीते महीने पर विचार करने और आने वाले समय को अच्छे कर्मों से जोड़ने का अवसर भी बनता है। लोग गुरुद्वारे जाते हैं, गुरबाणी सुनते हैं और सरबत के भले की अरदास करते हैं।

यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि संग्रांद कोई अनिवार्य व्रत नहीं है। सिख जीवन में किसी खास तारीख से अधिक महत्व गुरबाणी की सीख को रोजमर्रा के व्यवहार में उतारने का है।

अस्सू की संग्रांद का क्या महत्व है

अस्सू पंजाबी कैलेंडर का सातवां महीना माना जाता है। यह समय आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर के बीच आता है। मौसम के लिहाज से भी अस्सू बदलाव लेकर आता है। तेज गर्मी धीरे-धीरे कम होने लगती है और वातावरण में शरद ऋतु की आहट महसूस होने लगती है।

गुरबाणी में अस्सू महीने के माध्यम से मनुष्य के मन की उस अवस्था का वर्णन मिलता है, जिसमें वह परमात्मा से जुड़ने की चाह रखता है। इसका संदेश बाहरी रस्मों तक सीमित नहीं है। असली बात अपने मन को अहंकार, दिखावे और बुरे विचारों से हटाकर नाम, सेवा और सच्चाई की ओर ले जाना है।

अस्सू की संग्रांद पर क्या करें

इस दिन सुबह स्नान करके कुछ समय सिमरन और गुरबाणी के लिए निकाल सकते हैं। घर या गुरुद्वारे में शांत मन से अरदास करें। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, लंगर की सेवा में शामिल होना या किसी दुखी व्यक्ति का साथ देना भी इस दिन को सार्थक बना सकता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

और पढ़ें
End of Article