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'बंदर क्या जानें आदरक का स्वाद', क्या आप जानते हैं हिंदी के इस मुहावरे का अर्थ, छात्रों के लिए जानना बेहद जरूरी

देशभर में बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत हो गई है। कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं। ऐसे में हिंदी विषय जैसे स्कोरिंग विषय की तैयारी में कमी न रह जाए इसलिए आज हिंदी के 10 प्रसिद्ध मुहावरे शेयर और उनका अर्थ शेयर करेंगे, जो छात्रों के लिए मददगार साबित होंगे।

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'बंदर क्या जानें आदरक का स्वाद', क्या आप जानते हैं हिंदी के इस मुहावरे का अर्थ (Photo- Canva)

देशभर में बोर्ड परीक्षाओं का सीजन शुरू हो चुका है। कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों ने परीक्षा की तैयारी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, ताकि वे बेहतरीन अंकों के साथ परीक्षा पास कर सकें। अक्सर छात्र इंग्लिश, फिजिक्स, मैथ्स और साइंस जैसे विषयों पर अधिक ध्यान देते हैं और इस बीच हिंदी विषय को भूल जाते हैं। हिंदी की परीक्षा में 'मुहावरे' एक ऐसा सेक्शन है, जो दिखने में तो आसान लगता है, लेकिन सही अर्थ और वाक्य प्रयोग न पता होने के कारण छात्रों के नंबर कट जाते हैं। आपको इस मुश्किल का सामना करना पड़े, इसलिए इसे आपके लिए आसान बनाते हुए आज हिंदी के 10 प्रसिद्ध मुहावरे लेकर आए हैं, जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी में आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं और अच्छे अंक भी दिला सकते हैं।

छात्रों के लिए 10 महत्वपूर्ण हिंदी मुहावरे

1. आसमान से गिरा खजूर में अटका

अर्थ- एक मुसीबत से निकलकर दूसरी में फंस जाना।

वाक्य- बिजली बिल की समस्या सुलझी ही थी कि घर का पानी का पाइप फट गया, यह तो वही बात हुई कि आसमान से गिरा खजूर में अटका।

2. चिराग तले अंधेरा

अर्थ- दूसरों को रोशनी (ज्ञान) देने वाले के पास ही बुराई या अज्ञानता होना।

वाक्य- पूरे शहर को अनुशासन सिखाने वाले मास्टर जी का अपना बेटा ही आवारा है, इसे कहते हैं चिराग तले अंधेरा।

3. ऊंट के मुंह में जीरा

अर्थ- बहुत अधिक आवश्यकता होने पर बहुत कम वस्तु मिलना।

वाक्य- पहलवान को नाश्ते में केवल एक बिस्कुट देना तो ऊंट के मुंह में जीरा देने के समान है।

4. काला अक्षर भैंस बराबर

अर्थ- बिल्कुल अनपढ़ होना।

वाक्य- दादाजी के लिए यह अंग्रेजी अखबार काला अक्षर भैंस बराबर है।

5. घर की मुर्गी दाल बराबर

अर्थ- आसानी से उपलब्ध या घर की कीमती वस्तु को भी महत्व न देना।

वाक्य- राहुल का भाई डॉक्टर है, पर वह इलाज के लिए बाहर जाता है। सच है, घर की मुर्गी दाल बराबर।

6. नाच न जाने आंगन टेढ़ा

अर्थ- अपनी कमी को छिपाने के लिए दूसरों या परिस्थिति में दोष निकालना।

वाक्य- उसे सवाल हल करना तो आता नहीं और कहता है कि पेन खराब है। इसे कहते हैं नाच न जाने आंगन टेढ़ा।

7. कोल्हू का बैल

अर्थ- दिन-रात लगातार कड़ी मेहनत करने वाला।

वाक्य- परीक्षा के दिनों में छात्र कोल्हू के बैल की तरह पढ़ाई में जुटे रहते हैं।

8. धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का

अर्थ- कहीं का न रहना या जिसका कोई निश्चित ठिकाना न हो।

वाक्य- दो नावों पर पैर रखने वाला व्यक्ति अक्सर धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का जैसा हो जाता है।

9. दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है

अर्थ- एक बार धोखा खाने के बाद बहुत अधिक सावधान हो जाना।

वाक्य- पिछली बार जब सोहन ने सस्ती कंपनी का फोन लिया तो वह खराब निकल गया, अब वह ब्रांडेड चीजें ही लेता है। यह वही बात है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है।

10. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद

अर्थ - कीमती वस्तु को परखने और उसके महत्व की समझ न होना।

वाक्य- शानू को कीमती रेशमी साड़ी की अहमियत क्या पता, उसने तो इसे पोंछा बना दिया। वही बात हुई, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

varsha kushwaha
varsha kushwaha author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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