NDA Success Story: आपने परीक्षा पास करने और उसमें टॉप करने वाले उम्मीदवारों की सफलता की कहानियां तो बहुत सुनी होगी, लेकिन कुछ कहानियां सिर्फ परीक्षा पास करने तक नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों के संघर्ष, अनुशासन और अटूट समर्पण की मिसाल होती हैं। जी हां, आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी के बारे में बताने वाले हैं, जो बिहार के समस्तीपुर जिले से सामने आई है। यहां के मोहिउद्दीन नगर प्रखंड के नंदनी गांव के रहने वाले अभिनय कुमार ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक एनडीए (NDA - नेशनल डिफेंस एकेडमी) एग्जाम को अपने पहले ही प्रयास में पास किया। छोटी उम्र में घर छोड़कर अपनी पढ़ाई करने वाले अभिनय कुमार ने इस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने पूरे परिवार का नाम रोशन किया है।
छोटी उम्र में छोड़ा घर
बता दें कि अभिनय कुमार ने महज दो से 3 साल की उम्र में माता-पिता से दूर रहकर पढ़ाई की थी। उनकी कड़ी मेहनत और लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने भारतीय सेना में जाने के अपने सपने को पूरा किया और एनडीए की परीक्षा पास कर अब वह भारतीय सेना (Indian Army) में अधिकारी बनने की राह पर हैं।
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नाना-पिता का सपना किया पूरा
पीढ़ियों से भारतीय सेना में अपने परिवार को देख रहे अभिनय की रग-रग में देश सेवा की भावना बसी है। उनके नाना विजय कुमार ठाकुर भारतीय सेना में सूबेदार मेजर रह चुके हैं, जबकि उनके पिता प्रभाकर कुमार वर्तमान में सेना में हवलदार के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं। पिता और नाना दोनों की दिली ख्वाहिश थी कि उनके परिवार की अगली पीढ़ी सिर्फ एक सैनिक के रूप में नहीं, बल्कि सीधे एक सैन्य अधिकारी के तौर पर देश की कमान संभाले। बस, अभिनय ने उनके इस सपने को सच कर दिखाया है। अभिनय ने बताया कि नाना ने बचपन से ही अभिनय को फौजी अनुशासन और कड़े संस्कारों के बीच पाला। आज उनकी यह मेहनत रंग लाई।
सैनिक स्कूल पुरुलिया से मजबूत हुई कामयाबी की नींव
भारतीय सेना में जाने की अभिनय के सफर की असल में शुरुआत तब हुई जब उनके नाना ने उनका दाखिला पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल, पुरुलिया में कराया। कक्षा छठी से ही सैनिक स्कूल के अनुशासित माहौल, शिक्षकों के बेहतरीन मार्गदर्शन और सैन्य संस्कृति ने अभिनय के भीतर एनडीए पास करने की मजबूत बुनियाद तैयार की। यहां उन्होंने तय किया कि वह सेना में जाने की परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे और नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।
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पहले ही प्रयास में मारी बाजी
हम सभी जानते हैं कि एनडीए की परीक्षा कितनी कठिन होती है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभिनय के बैच के 43 छात्रों में से केवल 17 छात्र ही ऐसे थे, जो लिखित परीक्षा पास कर पाए। कड़ी मेहनत केवल लिखित परीक्षा तक ही सीमित नहीं थी। इसके बाद सामने आती है सबसे बड़ी चुनौती एसएसबी (SSB) इंटरव्यू। इस मुश्किल पड़ाव को पार करने के लिए अभिनय ने स्कूल के सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लिया। साथ ही, उनके चाचा संजीत ठाकुर ने भी अपने अनुभवों से अभिनय का हौसला बढ़ाया। सात सालों के लंबे अनुशासन और कड़ी मेहनत की बदौलत अभिनय ने पहले ही चांस में एनडीए और एसएसबी दोनों क्रैक कर परिवार का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
ऑल इंडिया 302वीं रैंक के साथ जिले का नाम किया रोशन
इस शानदार सफलता के बाद अभिनय ने एनडीए परीक्षा में ऑल इंडिया 302 वीं रैंक हासिल की। अभिनय अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने नाना, पिता और चाचा के अटूट विश्वास और मार्गदर्शन को देते हैं। तीन पीढ़ियों के त्याग और एक युवा के कड़े संकल्प ने आज समस्तीपुर के एक छोटे से गांव के बेटे को भारतीय सेना का होने वाला अधिकारी जो बना दिया है।
