एजुकेशन

डॉक्टर बनने का सपना टूटा तो चुनी नई राह, 20 की उम्र में 72 लाख का पैकेज पाकर रचा इतिहास

Rituparna KS Success Story: नीट परीक्षा के बाद MBBS सीट न मिलने पर सब हार मान लेते हैं वहां रितुपर्णा केएस ने रोबोटिक्स इंजीनियरिंग की राह चुनकर इतिहास रचा। अब वह रोल्स-रॉयस में 72.3 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर कार्यरत है।

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Rituparna KS Success Story (Photo -AI)

Rituparna KS Success Story: नीट की परीक्षा में असफल होना छात्रों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होता। अपना सपना शैटर होते हुए देखना आसान बात नहीं है। कई छात्र तो इसे अपने सपनों का अंत मान लेते हैं। लेकिन वहीं कर्नाटक की रहने वाली रितुपर्णा केएस (Rituparna KS) है, जिन्होंने नीट के बाद मेडिकल की सीट न मिलने पर निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्हें मेडिकल में जाने के अपने सपने के अंत को अपना अंत नहीं माना और एक नई कहानी की शुरुआत की और 20 साल की उम्र में 72.3 लाख का पैकेज प्राप्त कर इतिहास रच दिया। ऐसे वह युवा पीढ़ी खासतौर पर परीक्षा में सफल न होने पर हार मानने वाले उम्मीदवारों के लिए मिसाल बन गई।

रोल्स-रॉयस ने दिया लाखों का पैकेज

महज 20 साल की उम्र में रितुपर्णा दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कंपनियों में से एक 'रोल्स-रॉयस' (Rolls-Royce) में रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं और उनका सालाना पैकेज 72.3 लाख रुपये का है। कहां एक समय पर डॉक्टर बनने की इच्छा लिए नीट देने वाली एक छात्र आज 72 लाख के पैकेज पर इंटरनेशनल कंपनी में काम कर रही है। आइए जानते हैं उनकी प्रेरणात्मक कहानी।

मेडिकल का सपना टूटने पर चुना रोबोटिक्स का रास्ता

रितुपर्णा शुरुआत से ही एक डॉक्टर बनना चाहती थी। उन्होंने नीट के कड़ी मेहनत की, लेकिन फिर भी उन्हें एमबीबीएस की सीट नहीं मिली। लेकिन यहां उन्होंने हार नहीं मानी और समय बिना बर्बाद किए दिशा बदलने का फैसला लिया। उन्होंने 'सह्याद्री कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट' में मेकाट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला लिया। रितुपर्णा के लिए उनका यह फैसला उनकी जिंदगी आगे बदलने वाला था उन्हें यह मालूम नहीं था।

बिना टॉप इंस्टीट्यूट टैग के पाया लाखों का पैकेज

रितुपर्णा के पास किसी आईआईटी (IIT) या देश के टॉप-लेवल संस्थान का टैग नहीं था, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना प्रैक्टिकल स्किल्स सीखने और असल दुनिया की समस्याओं को तकनीकी रूप से हल करने पर पूरा ध्यान लगाया। उन्होंने खुद को कई चीजों में एनरोल किया और वो कर दिखाया, जो कई बार अच्छे-अच्छे IITans नहीं कर पाते हैं।

खेती-किसानी के लिए बनाया रोबोट

पढ़ाई के दौरान रितुपर्णा ने अपनी तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले समाज की भलाई के लिए किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देते हुए सुपारी की खेती करने वाले किसानों की मदद के लिए एक रोबोट तैयार किया। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर्नाटक (NITK) सूरतकल के साथ मिलकर कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम किया। अपने तकनीकी ज्ञान और योगदान के लिए रितुपर्णा ने अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया।

8 महीने की कठिन इंटर्नशिप के बाद मिला धमाकेदार पैकेज

रितुपर्णा के करियर का सबसे बड़ा यू-टर्न रोल्स-रॉयस कंपनी में इंटर्नशिप का मिला मौका था। करीब आठ महीनों तक उन्होंने देर रात की शिफ्टों में काम करने के साथ-साथ अपने कॉलेज की पढ़ाई और कोर्स वर्क के बीच तालमेल बिठाया। उन्होंने कड़ी मेहनत और संघर्ष किया। उनके इस असाधारण प्रदर्शन को देखते हुए कंपनी ने उन्हें शुरुआत में 39.6 लाख रुपये सालाना का प्री-प्लेसमेंट ऑफर (PPO) दिया था। लेकिन कंपनी के प्रोजेक्ट्स में उनके बेहतरीन योगदान को देखते हुए इस पैकेज को बढ़ाकर सीधे 72.3 लाख रुपये सालाना कर दिया गया। बता दें कि दिसंबर 2024 में उन्होंने रोल्स-रॉयस में फुल-टाइम रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में ज्वाइन किया था।

एक परीक्षा आपका पूरा भविष्य तय नहीं कर सकती

रितुपर्णा की यह सफलता उन लाखों छात्रों को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि एक परीक्षा आपका पूरा भविष्य तय नहीं कर सकती है। परीक्षाओं के दबाव में आकर तनाव महसूस करना आम बात है, लेकिन एक परीक्षा पर पूरी तरह से निर्भर हो जाना सही नहीं है। रितुपर्णा की कहानी साबित करती है कि कोई भी एक सिंगल रिजल्ट आपकी पूरी जिंदगी की काबिलियत को तय नहीं कर सकता।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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