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Delhi AQI: स्मॉग की चादर में आज भी लिपटी दिल्ली; 300 के पार AQI, कई इलाकों में हालात गंभीर के करीब

सोमवार सुबह राजधानी का औसत AQI 318 दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। बवाना, विवेक विहार, आनंद विहार और रोहिणी जैसे इलाकों में AQI 350 से ऊपर रहा, जहां घना स्मॉग और कम विजिबिलिटी ने हालात बिगाड़े। CREA की रिपोर्ट बताती है कि नवंबर में प्रदूषण अक्टूबर की तुलना में दोगुना हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार इस सप्ताह भी हवा में सुधार की संभावना नहीं है।

Delhi AQI today

दिल्ली में आज भी हालात 'बहुत खराब' (फाइल फोटो : PTI)

Photo : PTI

Delhi AQI Today: दिल्ली में सर्दियों के साथ जहरीली हवा का संकट लौट आया है। पूरे नवंबर इससे जूझने के बाद, दिसंबर में भी हवा में कोई राहत नहीं दिखाई दे रही है। सोमवार सुबह 8 बजे तक राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 318 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। सुबह 6:06 बजे तक के आंकड़ों में भी स्थिति लगभग इसी स्तर पर रही। नीले आसमान की आड़ में दिल्ली की हवा में घुला जहर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसकी मार सीधे लोगों की सेहत पर पड़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार ‘बहुत खराब’ हवा में लंबे समय तक रहने से सांस संबंधी बीमारियां, दिल की समस्याएं और आंख व गले में जलन जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाके

राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 के आसपास दर्ज किया गया, जो ‘Severe’ यानी गंभीर श्रेणी के बेहद करीब है। सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में बवाना (367), मुंडका (355), विवेक विहार (355), आनंद विहार (354), जहांगीरपुरी (347), रोहिणी (349), वजीरपुर (349), DTU (343), नेहरू नगर (346) और नरेला (345) शामिल रहे। इन इलाकों में सुबह घना स्मॉग छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी में भी कमी आई।

कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम जरूर दर्ज किया गया, लेकिन यह अभी भी सुरक्षित सीमा से काफी दूर है। राहत वाले क्षेत्रों में NSIT द्वारका (AQI 232), IGI एयरपोर्ट T3 (229), शादीपुर (268) और आया नगर (269) शामिल रहे। इन स्थानों पर वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी से नीचे रही, जिससे हालात थोड़े बेहतर दिखे, हालांकि प्रदूषण का असर अब भी साफ तौर पर महसूस किया गया।

नवंबर में दोगुना हुआ प्रदूषण

ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में दिल्ली का औसत AQI अक्टूबर की तुलना में लगभग दोगुना दर्ज किया गया। रिपोर्ट यह भी बताती है कि पराली जलाने की घटनाओं का योगदान इस साल कम रहा है, लेकिन स्थानीय वजहें—जैसे वाहन उत्सर्जन, धूल, औद्योगिक प्रदूषण और ठंडी हवाओं के कारण हवा का स्थिर होना, दिल्ली की आबोहवा को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

यह सप्ताह हालात रहेंगे ‘बहुत खराब’

केंद्रीय वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली (EWS) के पूर्वानुमान के अनुसार, इस पूरे सप्ताह हवा में ज्यादा सुधार की उम्मीद नहीं है। 11 से 13 नवंबर के बीच दिल्ली ने लगातार तीन दिन ‘Severe’ AQI झेला था, और अब फिर से हवा उसी गंभीर रेंज की ओर बढ़ती नजर आ रही है। सोमवार सुबह ITO, इंडिया गेट, आनंद विहार और द्वारका सहित कई जगहों पर घना स्मॉग छाया रहा। वाहनों की हेडलाइट जलाकर लोग सड़क पर निकलते दिखे। प्रदूषण और कोहरे के मिश्रण से विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है।

AQI का क्या मतलब है?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 0 से 500 तक होता है और इसे छह श्रेणियों में बांटा गया है, जो प्रदूषण के स्तर और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को दर्शाती हैं। 0 से 50 तक का AQI "अच्छा" माना जाता है, जिसमें स्वास्थ्य पर कोई खास असर नहीं पड़ता। 51 से 100 "संतोषजनक" श्रेणी है, जहां हवा स्वीकार्य रहती है, हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी रोगियों को हल्की परेशानी हो सकती है। 101 से 200 "मध्यम" श्रेणी है, जिसमें प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा, फेफड़ों या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। 201 से 300 "खराब" श्रेणी है, जिसमें लंबे समय तक रहने पर सामान्य लोगों को भी सांस लेने में असुविधा होती है। यह स्तर सर्दियों में राजधानी के कई हिस्सों में आम हो गया है। 301 से 400 "बहुत खराब" श्रेणी है, जिसमें लंबे समय तक रहने पर स्वस्थ व्यक्तियों को भी श्वसन रोग का खतरा होता है। सबसे खतरनाक श्रेणी "गंभीर" है, जिसमें AQI 401 से 500 तक होता है और इस स्तर पर हवा सभी के लिए खतरनाक हो जाती है।

 Nishant Tiwari
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निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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