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सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी मामले में आदेश वापस लिया, पूछा कि क्या उनके खिलाफ कोई जांच लंबित है

मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की जमानत याचिका पर अब अगली तारीख को फैसला होगा। अब्बास अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक हैं। इस मामले में अंसारी को छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था।

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मुख्तार अंसारी का बेटा अब्बास अंसारी (फोटो- AbbasAnsari00786)

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपना वह आदेश वापस ले लिया जिसमें पुलिस को ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी के खिलाफ जांच 10 दिन के भीतर पूरी करने को कहा गया था। न्यायालय ने इसके बजाय पुलिस से यह जानना चाहा कि क्या उनके खिलाफ कोई जांच लंबित है।

छह मार्च को अगली सुनवाई

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए छह मार्च की तारीख तय की है। इससे पहले अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और उत्तर प्रदेश ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। सिब्बल ने कहा कि राज्य ने मामले में गलत हलफनामा दाखिल किया है और अंसारी के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि उन्हें इस मामले पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। इससे पहले दिन में पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस को ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत अंसारी के खिलाफ मामले की जांच 10 दिन के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा कि मामले की जांच पूरी होने के बाद वह अंसारी की जमानत याचिका पर विचार करेगी।

मामले में अबतक क्या-क्या हुआ

अंसारी ने मुठभेड़ के डर से 31 जनवरी को ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत एक मामले में अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही में डिजिटल माध्यम से पेश होने का अनुरोध किया था। पिछले साल 18 दिसंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन पर और कुछ अन्य लोगों पर वित्तीय एवं अन्य लाभ के लिए गिरोह बनाने का आरोप लगाया गया था। चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को अंसारी, नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा दो, तीन के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर जबरन वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया था।

भाषा एजेंसी

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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