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ऑनलाइन गेम की लत ने बनाया कंगाल! फिर नर्सिंग छात्रा ने रची खौफनाक साजिश...पुलिस भी हैरान

यूपी के झांसी में ऑनलाइन गेम में लाखों रुपये गंवाने वाली छात्रा ने खुद के अपहरण की साजिश रची थी। इस मामले में आरोपी छात्रा और उसके चार दोस्तों को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया है।

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ऑनलाइन गेम की लत ने बनाया कंगाल! फिर नर्सिंग छात्रा ने रची खौफनाक साजिश...पुलिस भी हैरान

झांसी: जिले के टोडी फतेहपुर क्षेत्र में नर्सिंग की एक छात्रा ने ऑनलाइन गेमिंग में लाखों रुपये गंवाने के बाद उनकी भरपाई के लिये कथित तौर पर खुद के अपहरण की झूठी कहानी रची और अपने परिजनों से छह लाख रुपये की फिरौती मांगी। अधिकारी ने बताया कि मामले में आरोपी छात्रा और उसके चार दोस्तों को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया है।

अपहरणकर्ताओं ने मांगी थी 6 लाख की फिरौती

झांसी जिले की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुधा सिंह ने बताया कि टोडी फतेहपुर के निवासी बबलू रैकवार ने सोमवार को प्राथमिकी दर्ज करवाई थी कि नर्सिंग पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर रही उनकी बेटी नंदनी (19) का अपहरण हो गया है और उसे छोड़ने के एवज में छह लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को छात्रा के पहले दिल्ली में और फिर नोएडा मे मौजूद होने की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि विशेष अभियान समूह और पुलिस की टीम बुधवार को नोएडा पहुंची तो मामले की असलियत सामने आयी।

एसएसपी ने बताया कि छात्रा ने पूछताछ में बताया कि उसने ऑनलाइन गेमिंग (सट्टा) में करीब ढाई लाख रुपये गंवा दिए थे। इसमें उसके कुछ दोस्तों का भी धन लगा था। इसकी भरपाई के लिये उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी रची और अपने पिता को व्हॉट्सऐप पर कॉल करवाकर फिरौती की मांग करवाई। उन्होंने बताया कि आरोपी छात्रा और साजिश में शामिल उसके चार दोस्त हृदयेश, प्रियांशु, शिवम और नंदकिशोर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले में जांच जारी है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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