Jaipur Digital Signatures Fraud: जयपुर पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड के आधार पर डिजिटल सिग्नेचर बनाकर 400 करोड़ रुपए के फ्रॉड का खुलासा किया है। डीजीएफटी-आईसीईगेट स्क्रिप घोटाले के मामले में जयपुर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने सबसे पहले फर्जी आधार और पैन कार्ड के आधार पर डिजिटल सिग्नेचर बनवाए।
इसके बाद डीजीएफटी-आईसीईगेट के सुरक्षित पोर्टल पर अनाधिकृत रूप से लॉगिन किया और वास्तविक खातों की जानकारी हासिल की। खातों में उपलब्ध ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स को अपने नियंत्रण वाले फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लिया और उन्हें भुनाकर राशि प्राप्त कर ली। इस राशि को सीधे प्रयोग करने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, इस तरह 400 खातों से करीब 400 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया गया है।
आरोपी फर्जी आधार व पैन कार्ड से डिजिटल सिग्नेचर बनाते थे
जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि आरोपी फर्जी आधार व पैन कार्ड से डिजिटल सिग्नेचर बनाते थे, करीब एक दर्जन आरोपियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रत्येक फर्जी डिजिटल सिग्नेचर से औसतन एक करोड़ रुपए का फ्रॉड किया गया है. करीब 400 फर्जी डिजिटल सिग्नेचर मिले हैं।
साइबर थाना पुलिस ने सुल्तान खान, नंदकिशोर, निर्मल सोनी, अशोक कुमार भंडारी और प्रमोद खत्री को गिरफ्तार किया है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट बनवाए, फिर उनका उपयोग कर डीजीएफटी-आईसीईगेट पोर्टल पर अनाधिकृत लॉगिन किया। वास्तविक खातों की जानकारी हासिल कर ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स को अपने नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर कर लिया।
डीजीएफटी को सुरक्षित प्लेटफॉर्म माना जाता है
राशि को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय कई बैंक खातों के माध्यम से बार-बार ट्रांसफर कर स्रोत छुपाया गया। ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स सरकार द्वारा निर्यातकों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता होती है। स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश ने बताया कि परिवादी ने करीब 93 लाख रुपए के फ्रॉड की शिकायत दी थी, जिसके बाद सारा फ्रॉड सामने आया, डीजीएफटी को सुरक्षित प्लेटफॉर्म माना जाता है। पहली बार किसी ने इस प्लेटफॉर्म को हैक करने की कोशिश की है। गिरफ्तार पांच लोगों में से चार फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाते थे, जबकि एक आरोपी उपकरण मुहैया करवाता था। सभी दिल्ली जाकर व्यवस्था बनाते थे, ताकि आईसीईगेट में सेंध लगा सकें और दुबई के प्लेटफॉर्म से रिवॉर्ड्स अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर सकें। अभी तक करीब 400 करोड़ का फ्रॉड संभावित है, जो अनुसंधान आगे बढ़ने पर और बढ़ सकता है।
परिवादी की डीजीएफटी खाते में ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर बदला गया
परिवादी की डीजीएफटी खाते में ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर बदला गया, साथ ही कंपनी के डायरेक्टर की प्रोफाइल में बदलाव किया गया। डिजिटल सिग्नेचर अथॉरिटी से डेटा प्राप्त कर विश्लेषण किया गया तो पता चला कि 13-15 अज्ञात लोगों ने करीब 400 से अधिक फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाए. ये सिग्नेचर दुबई में डाउनलोड किए जाते थे, जहां से स्क्रिप्स/लाइसेंस को म्यूल आईसीईगेट आईडी में ट्रांसफर किया जाता था। दिल्ली में एजेंट इन्हें बेचने का काम करते थे।
