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Indore: नाले में मिला मूक बच्ची का शव, 2 दिन से थी लापता; सड़क पर उतरे लोग

एमपी के इंदौर में 6 वर्षीय एक मूक बच्ची का शव नाले में मिलने से नाराज लोग सड़क पर उतर आए। बच्ची शनिवार दोपहर शिवसागर कॉलोनी से लापता हुई थी।

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Indore: नाले में मिला मूक बच्ची का शव, 2 दिन से थी लापता; सड़क पर उतरे लोग

इंदौर: शहर में दो दिन पहले लापता हुई छह साल की मूक बच्ची का शव सोमवार को एक नाले में मिला जिसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रुबीना मिजवानी ने बताया,‘‘सीसीटीवी फुटेज से मिले सुरागों, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और खोजी कुत्ते की मदद से हम बच्ची को खोज रहे थे। पोकलेन मशीन से एक नाले का कचरा हटाए जाने पर हमें बच्ची का शव मिला। मूक बच्ची शनिवार दोपहर शिवसागर कॉलोनी से लापता हुई थी और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

डूबने का संदेह-पुलिस

एसीपी ने बताया कि बच्ची के माता-पिता गुजरात में रहते हैं और वह अपने इंदौर स्थित ननिहाल में एक शादी में शामिल होने आई थी। मिजवानी के मुताबिक बच्ची के शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसकी मौत डूबने से हुई और उसके शरीर पर चोट या हमले या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। बच्ची के नाले के किनारे की दीवार से नीचे गिरकर डूबने का संदेह है।

एसीपी ने बताया कि बच्ची के शव का चिकित्सकों के तीन सदस्यीय दल से पोस्टमॉर्टम कराया गया और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। बच्ची के कपड़े जस के तस पाए गए और शुरुआती जांच में उसके साथ दुष्कर्म का कोई सबूत नहीं मिला है। इस बीच, शिवसागर कॉलोनी के आक्रोशित नागरिकों ने बच्ची की मौत के खिलाफ स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कॉलोनी के रहवासी संघ के अध्यक्ष मुनेष पाठक ने कहा,‘‘हम इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन को कई बार लिखित आवेदन दे चुके हैं कि नाले के किनारे की टूटी दीवार की मरम्मत कराई जाए, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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