क्राइम

धुले: खत्म हो गया परिवार! पति-पत्नी और 2 बच्चों की मिलीं सड़ी-गली डेडबॉडी; आत्महत्या-या हत्या?

महाराष्ट्र के धुले जिले में घर से एक ही परिवार के चार लोगों के शव बरामद हुए हैं। पति फांसी के फंदे से लटका मिला तो पत्नी और 2 बच्चों की के शव जमीन पर पड़े मिले हैं।

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धुले: खत्म हो गया परिवार! पति-पत्नी और 2 बच्चों की मिलीं सड़ी-गली डेडबॉडी; आत्महत्या-या हत्या?

धुले: जिले में गुरुवार को एक दम्पति और उनके दो बच्चे अपने घर में मृत पाये गये। एक अधिकारी ने बताया कि प्रमोद नगर इलाके की समर्थ कॉलोनी में घटी यह घटना पूर्वाह्न करीब 11 बजे प्रकाश में आई, जब कुछ पड़ोसियों ने परिवार के बंगले से तेज गंध महसूस की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस को बंगले के अंदर प्रवीण सिंह गिरासे (53), उनकी पत्नी दीपांजलि (47) और उनके बच्चों मितेश (18) और सोहम (15) के सड़े हुए शव मिले। प्रवीण सिंह का शव छत से लटका मिला, जबकि उनकी पत्नी और बच्चे फर्श पर मृत पाए गए।

पत्नी और बच्चों ने खाया जहरीला पदार्थ

पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रवीण सिंह का शव फंदे से लटका मिला, जबकि उनकी पत्नी और बच्चे फर्श पर मृत पाए गए। उन्होंने बताया कि कोई पत्र नहीं मिला है। पड़ोसियों के अनुसार पिछले दो दिनों से घर में कोई हलचल नहीं देखी गई थी। अधिकारी ने बताया कि धुले के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम से पता चला है कि पत्नी और दोनों बच्चों ने कोई जहरीला पदार्थ खाया था। गिरासे की लामकनी गांव में कीटनाशक बेचने की दुकान थी, जबकि उनकी पत्नी शिक्षिका थीं और बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।

मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि गिरासे और अन्य परिवार के तीन अन्य सदस्यों मे आत्महत्या की है या नहीं तथा ऐसा कदम उठाने के पीछे क्या कारण है। देवपुर पश्चिम पुलिस थाने में दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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