ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप को लोग तभी गंभीरता से लेते हैं, जब डॉक्टर के पास जांच कराने जाते हैं। वैसे क्या साल में एक-दो बार ब्लड प्रेशर नाप लेना ही काफी है? हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जेरेमी लंदन के मुताबिक ऐसा नहीं है। उन्होंने घर पर नियमित रूप से ब्लड प्रेशर नापने और उसके आंकड़ों को दर्ज करने की सलाह दी है। इसके लिए उन्होंने ‘7-2-2 नियम’ बताया है, जिससे एक अकेली रीडिंग के बजाय कुछ दिनों का औसत सामने आ सकता है।
एक बार की रीडिंग पर क्यों निर्भर न रहें?
ब्लड प्रेशर पूरे दिन एक जैसा नहीं रहता। तनाव, घबराहट, शारीरिक गतिविधि और दूसरी परिस्थितियों का असर रीडिंग पर पड़ सकता है। ऐसे में एक बार में पूरी तस्वीर क्लीयर नहीं होती। डॉ. जेरेमी के मुताबिक नियमित रूप से घर पर ब्लड प्रेशर जांचने से ज्यादा उपयोगी जानकारी मिल सकती है।
क्या है 7-2-2 नियम?
इसका मतलब समझना काफी आसान है। 7 दिन तक, दिन में 2 बार और हर बार 2 रीडिंग लेनी हैं। यानी सुबह और शाम ब्लड प्रेशर नापें और हर बार दो माप लें। इन सभी आंकड़ों को लिखकर रखें और उनका औसत निकालें। इस तरह डॉक्टर के पास सिर्फ एक दिन की रीडिंग के बजाय कई दिनों का रिकॉर्ड होगा।
घर पर रखें ब्लड प्रेशर मशीन
डॉ. लंदन ने घर पर ब्लड प्रेशर नापने वाली मशीन रखने की सलाह दी है। अगर यह संभव न हो तो नियमित जांच के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की मदद ली जा सकती है, जिसके पास मशीन हो। हालांकि मशीन से जांच करते समय सही तरीका अपनाना जरूरी है। गलत तरीके से ली गई रीडिंग आपको भ्रमित कर सकती है।
दूसरा जरूरी आंकड़ा
डॉ. लंदन ने सिर्फ ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि कमर और लंबाई के अनुपात पर भी ध्यान देने को कहा है। उनका कहना है कि केवल वजन देखकर किसी व्यक्ति की सेहत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। शरीर में चर्बी कहां जमा है, यह भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए कमर की माप को लंबाई के अनुपात में देखा जा सकता है।
0.5 से ज्यादा न हो अनुपात?
डॉ. जेरेमी लंदन के मुताबिक कमर और लंबाई का अनुपात 0.5 से अधिक नहीं होना चाहिए। कमर की माप आमतौर पर नाभि के आसपास ली जा सकती है। यह अनुपात पेट के भीतर जमा चर्बी यानी आंतरिक चर्बी का एक संकेत दे सकता है। हालांकि इसे किसी बीमारी का निदान मानने के बजाय स्वास्थ्य का एक सामान्य संकेतक समझना बेहतर है।
हाई ब्लड प्रेशर को हल्के में न लें
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। डॉ. लंदन ने इसे हृदय रोग के उन जोखिम कारकों में बताया, जिन पर जीवनशैली और उपचार के जरिए काम किया जा सकता है। भारत में भी उच्च रक्तचाप एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। मूल रिपोर्ट में आईसीएमआर के अनुमान के अनुसार, देश में करीब 20 करोड़ वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं।
रिकॉर्ड डॉक्टर के लिए ज्यादा काम का
इस पूरी बात का सबसे अहम संदेश यही है कि ब्लड प्रेशर की सिर्फ एक रीडिंग देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं हो सकता। सात दिनों तक सुबह-शाम दो-दो रीडिंग लिखने से ब्लड प्रेशर का एक व्यापक रिकॉर्ड तैयार होता है। अगर लगातार रीडिंग सामान्य से ज्यादा आ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। 7-2-2 नियम को इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि नियमित निगरानी का एक तरीका समझें।
