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चंडीगढ़ जिला कोर्ट में चली गोली, पंजाब पुलिस के पूर्व AIG ने ली दामाद की जान

Chandigarh Court Murder News: ​आरोपी की पहचान पंजाब पुलिस के पूर्व एआईजी मलविंदर सिंह सिद्धू के तौर पर हुई है। वहीं, मृतक उसका ही दामाद था, जो कृषि विभाग में लेखा नियंत्रक था। पुलिस ने आरोपी को पकड़कर हवालात में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच जमीनी विवाद चल रहा था।

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Chandigarh District Court Murder

Photo : iStock

Chandigarh Court Murder News: चंडीगढ़ जिला अदालत में आज गोली चलने का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब पुलिस के पूर्व एआईजी ने अपने दामाद की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि दोनों परिवारों के बीच घरेलू विवाद चल रहा था। इसी मामले में दोनों पक्ष शनिवार को चंडीगढ़ फैमिली कोर्ट में पहुंचे थे।

आरोपी की पहचान पूर्व एआईजी मलविंदर सिंह सिद्धू के तौर पर हुई है। मरने वाला दामाद कृषि विभाग में लेखा नियंत्रक था। दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी कि तभी आरोपी ने बाथरूम जाने की बात कही। इस पर उसके दामाद ने कहा कि मैं रास्ता बताता हूं। दोनों कमरे से बाहर निकल गए। इसी दौरान आरोपी ने अपनी बंदूक से पांच फायर किए। इनमें से दो गोली युवक को लगी। वहीं एक गोली अंदर कमरे के दरवाजे पर लगी। दो फायर खाली चले गए।

कोर्ट में गोली की आवाज से हड़कंप

जिला अदालत में गोली की आवाज सुनते ही हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे वकीलों ने आरोपी को पकड़कर एक कमरे में बंद कर दिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद घायल को सेक्टर 16 अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे में बंद आरोपी को हिरासत में लिया और थाने ले गई। हादसे के बाद कई जज भी मौके पर पहुंचे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस ने हथियार भी किया बरामद

चंडीगढ़ एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि हमें आज दोपहर करीब 2 बजे जिला न्यायालय के मीडिएशन सेंटर में गोलीबारी की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची और पाया कि पीड़ित का नाम हरप्रीत सिंह है और उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। कथित आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया और पुलिस हिरासत में ले लिया गया और उसके पास से एक हथियार बरामद किया गया। कथित आरोपी पंजाब पुलिस का रिटायर्ड एआईजी मलविंदर सिंह है। एफएसएल टीम को बुलाकर मौके की जांच की जा रही है। हम प्रत्यक्षदर्शियों से भी बात कर रहे हैं। यह जांच की जा रही है कि कथित आरोपी किस गेट से कोर्ट में दाखिल हुआ। हमने उसके पास से .32 बोर की पिस्तौल बरामद की है और हमें 4 चलाई गई गोलियां और 3 इस्तेमाल नहीं की गई गोलियां बरामद हुई हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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