आज आपको जल्दी में कहीं भी जाना होता है तो आप तुरंत फ्लाइट की टिकट बुक करते हैं और हवाई जहाज से वहां पहुंच जाते हैं। देश के हर बड़े शहर में एयरपोर्ट हैं और अब तो छोटे-छोटे शहरों को भी हवाई मार्ग से जोड़ा जा रहा है। उड़ान योजना के तहत इन शहरों में एयरपोर्ट बनाकर, वहां के लोगों की हवाई यात्रा का सपना पूरा किया जा रहा है। देश में दिल्ली और मुंबई जैसे बहुत बड़े और भव्य एयरपोर्ट हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का पहला एयरपोर्ट कौन सा था? चलिए जानते हैं देश के उस पहले एयरपोर्ट के बारे में और आज उसकी स्थिति क्या है -
देश का पहला एयरपोर्ट किस शहर में बना?
देश का पहला एयरपोर्ट देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बना था, जो उस समय बंबई था और बंबई स्टेट के अंतर्गत आता था।
देश के पहले एयरपोर्ट का नाम क्या था?
देश के पहले एयरपोर्ट का नाम जूहू एयरोड्रोम था, जो साल 1928 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान बना था। इस एयरपोर्ट के बनने के साथ ही भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत हुई थी। इस एयरपोर्ट ने देश हवाई सफर के इतिहास में अहम भूमिका निभाई।
जूहू एयरोड्रोम कहां पर है?
जूहू एयरोड्रोम महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में अरब सागर के तट पर मौजूद है। आज के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बनने से पहले यही जूहू एयरोड्रोम मुंबई का प्रमुख एयरपोर्ट था।
जूहू एयरोड्रोम, देश के पहले एयरपोर्ट से पहली उड़ान किसने भरी?
साल 1932 में जेआरडी टाटा ने कराची से बंबई के लिए उड़ान भरी और जूहू एयरोड्रोम पर पहले कॉमर्शियल विमान को उतारा। इसी के साथ टाटा एयरलाइन्स की शुरुआत हुई, जो बाद में एयर इंडिया कहलाई।
जूहू एयरपोर्ट क्यों बनाया गया था?
जूहू एयरपोर्ट को शुरुआत में हवाई जहाजों की मैनटेनेंस, फ्लाइंग क्लब और छोटे हवाई जहाजों की उड़ान के लिए इस्तेमाल किया गया। लेकिन जल्द ही यह भारतीयों की शुरुआती उड़ान और पोस्टल फ्लाइट के लिए काफी महत्वपूर्ण हवाई अड्डा बन गया।
क्या जूहू एयरपोर्ट अब भी चालू है?
क्या जूहू एयरपोर्ट से अब भी उड़ान सेवाएं संचालित होती हैं? इस प्रश्न का उत्तर है हां... लेकिन अब यहां से सिर्फ हेलीकॉप्टर की सेवाएं, छोटे एयरक्राफ्ट की उड़ान के साथ ही पायलट ट्रेनिंग स्कूल की उड़ाने संचालित होती हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कब बना?
छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट साल 1948 में बनकर तैयार हुआ और सभी कॉमर्शियल हवाई सेवाएं यहां से शुरू हो गईं। इसके बाद जूहू एयरोड्रोन का वह रुतबा भी खत्म हो गया, जो पहले एयरपोर्ट के तौर पर उसके पास था।
